
रेहटी। भाई-बहन के अटूट प्रेम और स्नेह का पर्व रक्षाबंधन पर बाजारों में रौनक बढ़ गई है. रंग-बिरंगी राखियों से सजी दुकानों पर बहनों की भीड़ नजर आने लगी है. कहीं पारंपरिक राखियां आकर्षण का केंद्र बनी हैं तो कहीं बच्चों के लिए कार्टून कैरेक्टर और आधुनिक डिजाइनों वाली राखियां पसंद की जा रही हैं. मिठाई और उपहारों की दुकानों पर भी ग्राहकों की आवाजाही बढऩे से बाजार गुलजार हो उठे हैं.
इस बार रक्षाबंधन का पर्व विशेष माना जा रहा है. ज्योतिषाचार्यों के अनुसार करीब 27 वर्षों बाद ऐसा दुर्लभ संयोग बन रहा है, जब रक्षाबंधन भद्रा के साये से मुक्त रहेगा. ज्योतिषीय गणना के अनुसार पूर्णिमा तिथि अगले दिन सुबह 9.38 बजे तक रहेगी. इसके बाद भाद्रपद की प्रतिपदा तिथि प्रारंभ होगी. मान्यता के अनुसार प्रतिपदा तिथि में राखी बांधना उचित नहीं माना जाता, इसलिए जो लोग पूर्णिमा तिथि में ही राखी बांधना शुभ मानते हैं, वे सुबह 9.38 बजे से पहले भाई की कलाई पर राखी बांध सकते हैं.
वहीं कुछ ज्योतिषाचार्यों का मत है कि उदया तिथि का मान पूरे दिन रहता है और इस बार भद्रा का साया नहीं होने के कारण दिनभर रक्षाबंधन मनाया जा सकता है. ऐसे में परिवार अपनी परंपरा और मान्यता के अनुसार राखी बांधने का समय तय कर सकते हैं.
