
रीवा, रीवा शहर के सिविल थाना प्रभारी विजय सिंह को पुलिस अधीक्षक डॉ. गुरकरन सिंह ने लाइन अटैच कर दिया गया.दरअसल चार दिन पूर्व सांई मंदिर के पास से एक ठेले से नशीली कफ सिरप मिली थी. पुलिस को अचानक ‘गुप्त सूचना’ मिलती है कि एक ठेले पर एनडीपीएस के तहत आने वाली प्रतिबंधित नशीली कफ सिरप की शीशियां रखी हैं. पुलिस मुस्तैदी दिखाती है और तुरंत कार्रवाई कर देती है.
साहू समाज का आरोप है कि पुलिस विभाग के ही एक चर्चित आरक्षक ने पहले खुद षड्यंत्र रचा, चुपके से ठेले में कफ सिरप की शीशियां रखवाई और फिर खुद ही ‘मुखबिर’ बनकर पुलिस टीम को फोन किया और मौके पर पहुंची पुलिस ने कार्रवाई कर सिरप जब्त किया.
इस कथित फर्जी कार्रवाई के विरोध में आरोपी के परिजन साहू समाज के लोग और भाजपा नेता बंसी साहू थाने के अंदर ही धरने पर बैठ गए, फिर क्या था? थाने के मुखिया, थाना प्रभारी विजय सिंह को यह ‘सत्याग्रह’ रास नहीं आया. दोनों पक्षों के बीच बातचीत से शुरू हुआ मामला देखते ही देखते ‘तू कौन? मैं कौन!’ और ‘तुम जानते नहीं मैं कौन हूँ!’ के स्तर पर आ गया. दोनों ओर से मर्यादाओं की धज्जियां उड़ीं, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ. भाजपा नेता का आरोप है कि थाना प्रभारी ने उनके साथ जमकर ‘अभद्रता’ (बदसलूकी) की. पूरे मामले को लेकर साहू समाज और व्यापारियों ने रीवा पुलिस महानिरीक्षक को ज्ञापन सौप कर कार्रवाई की मांग की थी. इधर वीडियो वायरल हुआ तो भाजपा के गलियारों में हडक़ंप मच गया. ‘अपराधियों पर भारी’ पडऩे वाली पुलिस सत्ताधारी नेता के सामने बैकफुट पर आ गई और पुलिस अधीक्षक ने सिविल लाइन थाना प्रभारी विजय सिंह को तत्काल प्रभाव से लाइन अटैच कर दिया गया. लेकिन इस मामले में जिस आरक्षक का नाम सामने आया है उसकी न तो जांच हुई और न ही कार्यवाही की गई.
