मालनपुर और बानमोर के उद्योगों में फिर आएगी बहार, सीएम जुटे

ग्वालियर चंबल डायरी

 

हरीश दुबे

 

दस्यु समस्या के कारण विकास का पहिया थमने और इसके चलते बेरोजगारी, गरीबी और पलायन जैसी समस्याओं के बढ़ने के बाद यहां औद्योगिक विकास को रफ्तार देने दशकों पहले मालनपुर और बानमोर में इंडस्ट्रियल एस्टेट बनाए गए थे। शुरू में तो सब कुछ ठीक ठाक चला, लेकिन बाजार में मंदी, नई औद्योगिक नीतियों, कड़े श्रम कानूनों, आपराधिक तत्वों के दखल देने जैसे कारणों के चलते तमाम कारखानेदारों ने यहां से पैकअप कर लिया। चंबल में दोनों ही मुख्य पार्टियां ताकतवर रही हैं लेकिन मालनपुर और बानमोर की पटरी से उतरी लाइन को फिर दुरुस्त करने खास प्रयास नहीं हुए। लेकिन अब लगता है कि मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव ने चंबल के इन औद्योगिक क्षेत्रों में फिर से चमन बरसाने की कमान संभाल ली है। मुख्यमंत्री ने मालनपुर में गोदरेज समूह के चौथे प्लांट का शुभारंभ किया है। इस प्लांट का विस्तार करीब साढ़े चारसौ करोड़ रुपए के निवेश से होने जा रहा है। कहा जा रहा है कि गोदरेज का यह चौथा प्लांट तो शुरुआत है, ग्वालियर में हुई पिछली इंवेस्टर मीट में जो एमओयू साइन हुए थे, अगले दो बरस में वे मालनपुर और बानमोर की सरजमीं पर साकार रूप लेने लगेंगे। आपको बता दें कि अपने सुनहरे दौर में मालनपुर में चारसौ की तादाद में छोटे बड़े कारखाने थे, इस क्षेत्र में अब लगभग 80 से 100 सक्रिय औद्योगिक इकाइयां ही काम कर रही हैं जिनमें एसआरएफ, सूर्या रोशनी, कैडबरीज, कर्लऑन, मोंटाज, वर्धमान, दावत फूड्स, ग्वालियर कार्टन जैसे बड़े ग्रुप भी शुमार हैं। फिलवक्त मालनपुर में दस हजार श्रमिक काम कर रहे हैं। यह अच्छी बात है कि इनमें अस्सी फीसदी स्थानीय हैँ लेकिन उच्च पदों पर सिर्फ बीस फीसदी ही स्थानीय युवा हैं। सांसद संध्या राय यह मामला लोकसभा में भी उठा चुकी हैं। उम्मीद लगा सकते हैं कि ऊंची तकनीकी डिग्रियां रखने वाले चंबल के नौजवानों को भी मालनपुर और बानमोर में रोजगार मिलेगा और उन्हें काम के लिए बाहर नहीं भटकना पड़ेगा।

 

निगम में नया निजाम

 

ग्वालियर की सड़कों की खराब गुणवत्ता और निर्माण कार्यों को लेकर मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है। सड़कों की गुणवत्ता जांचने कोर्ट एक समिति बना चुकी है और इस समिति ने सड़कों से नमूने लेने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। नमूनों की जांच शुरू होने के ठीक बाद जिस तरह निगम आयुक्त संघ प्रिय के तबादले की खबर सामने आई, उसने कई अटकलों और चर्चाओं को जन्म दे दिया। प्रशासनिक गलियारों से लेकर जनसाधारण के बीच यह सवाल पूछा जाने लगा कि क्या निगम आयुक्त के तबादले को ग्वालियर की सड़कों पर अदालत द्वारा अपनाए सख्त रवैए के संदर्भ में जोड़कर देखा जाना चाहिए। हालांकि यह किसी से छिपा नहीं है कि शहर में कई स्थानों पर सड़कें टूटी फूटी हैं और बड़े-बड़े गड्ढे समस्या बने हुए हैं। प्रशासनिक अधिकारियों के तबादले उनकी सेवा प्रक्रिया का एक हिस्सा होता है। संघप्रिय के तबादले और उनकी जगह नए विजन, नई सोच वाले अभिषेक चौधरी की ताजपोशी को हम इसी नजरिए से देखते हैं। कह सकते हैं कि नए निगम आयुक्त को चुनौतियों का अंबार मिला है जिन पर विजय पाकर ग्वालियर निगम को चुस्त दुरुस्त साबित करने की कसौटी है। पिछले आठ बरसों में अभिषेक चौधरी प्रदेश के उज्जैन, अनूपपुर और धार जैसे शहरों में एसडीओ, असि. कलेक्टर और सीईओ जैसे पदों पर रहे हैं। ग्वालियर जैसे प्रदेश के बड़े राजभोगी शहर की निगम कमिशनरी मिलना उनके कैरियर का अहम पड़ाव है। फिलहाल तो उनके समक्ष सबसे बड़ी चुनौती शहर की सड़कों की सूरत सुधारना है। बरसात का मौसम चल रहा है, सड़कों की हालत और खराब हो सकती है। आज की बरसात में ही शहर में तमाम जगह सड़कें धंसक गईं, देखना है कि निगम का नया निजाम खुद को किस तरह पहले से बेहतर साबित कर पाता है।

 

*प्रत्याशी तैयार रखने की नसीहत दे गए पटवारी*

 

दतिया विजय के बाद उत्साह से भरी कांग्रेस की नजर अब अगले साल होने जा रहे निकाय चुनाव पर है। कैलारस में शुगर मिल के आंदोलन में हौंसला अफजाई करने जाते समय जीतू पटवारी जब मुरैना, शिवपुरी और ग्वालियर रुके तो स्थानीय नेताओं से साफ कह दिया कि निकाय चुनाव के लिए अभी से जिताऊ प्रत्याशियों की खोजबीन शुरू कर दें। नेताओं ने भी मजबूरी जता दी कि जब तक परिसीमन और वार्ड आरक्षण की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक प्रत्याशी तलाशना मुमकिन नहीं है क्योंकि अभी यह तय नहीं है कि कौन सा वार्ड महिला आरक्षित होगा या एससी रिजर्व बनेगा। पटवारी ने भी कह दिया कि पिछले आरक्षण और जनसंख्या के आधार पर संभावित प्रत्याशियों को खोजा जा सकता है। बहरहाल, वार्डों के परिसीमन और प्रशासनिक तैयारियों का सिलसिला चुनावों के शेड्यूल के आधार पर आगे बढ़ रहा है। वर्ष 2027 की जनगणना तथा शासन के दिशा-निर्देशों को आधार बनाया जा रहा है। वार्डों की सीमा तय करने से पहले मतदाता सूचियों को अपडेट करने की प्रक्रिया चलेगी।

 

वफ़ा याद रक्खो, सितम भूल जाओ…

 

शायर कलीम आजिज बरसों पहले नसीहत दे गए हैं…”वो कहते हैं हर चोट पर मुस्कुराओ, वफ़ा याद रक्खो, सितम भूल जाओ।” लगता है कि इन चंद लाइनों को गोहद के भाजपा नेता लालसिंह आर्य गांठ बांध कर रखते हैं। विधानसभा चुनाव में उन्हें जीत के साथ कई बार हार भी नसीब हुई लेकिन उन्होंने भितरघात का राग अलापते हुए हार का ठीकरा अपने ही सहयोगियों पर नहीं फोड़ा। सन 2020 के उपचुनाव में जब अचानक उनका टिकट काटकर कांग्रेस छोड़कर आए सिंधिया समर्थक रणबीर जाटव को दे दिया गया, तब भी उन्होंने चुप रहकर पार्टी का फैसला कुबूल किया। अभी हाल ही में एक पड़ौसी जिले में अपना टिकट कटने पर एक कद्दावर नेता के समर्थकों ने जैसा बवाल काटा, वैसा नहीं होने दिया…।

Next Post

क्रेडिट कार्ड का झांसा देकर बुजुर्ग से साइबर ठगी

Thu Aug 27 , 2026
जबलपुर। रांझी न्यू शोभापुर कॉलोनी निवासी संजीव कुमार (56) क्रेडिट कार्ड जारी करने के नाम पर 37,799 की साइबर ठगी का शिकार हो गए। एक अज्ञात कॉलर ने उन्हें पंजाब नेशनल बैंक का क्रेडिट कार्ड देने का झांसा देकर व्हाट्सएप पर एक लिंक भेजा था। बातों में आकर संजीव ने […]

You May Like