नई दिल्ली, भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल के मौजूदा चीन दौरे के बीच, अगले महीने होने वाले ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के शामिल होने को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। भारत आगामी 12 से 13 सितंबर को इस बड़े सम्मेलन की मेजबानी करने जा रहा है, जिसमें जिनपिंग के साथ 400 अधिकारियों के आने की चर्चा थी, लेकिन चीनी सरकार या मीडिया की ओर से अब तक इस पर कोई आधिकारिक मुहर नहीं लगाई गई है।
पिछले रवैये और कूटनीतिक कारण
विश्लेषकों का मानना है कि शी जिनपिंग का यह रवैया नया नहीं है, क्योंकि वे इससे पहले 2023 के नई दिल्ली जी-20 सम्मेलन और 2025 के रियो डी जेनेरो ब्रिक्स सम्मेलन से भी दूरी बना चुके हैं। जानकारों के अनुसार, हाल ही में भारत द्वारा अरुणाचल प्रदेश के कई स्थानों के मानकीकरण और कूटनीतिक कदमों के कारण चीन असहज नजर आ रहा है, तथा जिनपिंग वैश्विक मंचों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ सीधा मंच साझा करने से बचते दिख रहे हैं।
भविष्य की रणनीतिक स्थिति
विशेषज्ञों का कहना है कि चीन व्यापारिक पाबंदियों में ढील, वीजा नियमों और ताइवान जैसे मुद्दों पर भारत के रुख को देखते हुए दबाव बनाने की रणनीति अपना रहा है। हालांकि 2025 के एससीओ (SCO) सम्मेलन में दोनों नेता मिले थे, लेकिन 2026 के इस आगामी ब्रिक्स सम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति का आना होगा या वे फिर से दूरी बनाएंगे, यह देखना कूटनीतिक रूप से बेहद दिलचस्प होगा।

