नई दिल्ली, अमेरिका, ईरान और इजराइल के बीच चल रहे भयंकर संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार गंभीर संकट से जूझ रहा है। सऊदी अरामको के प्रमुख के अनुसार, इस युद्ध की वजह से दुनिया भर में अब तक 2.6 अरब बैरल तेल की भारी कमी दर्ज की जा चुकी है, जो 1979 की ईरानी क्रांति के बाद से सबसे बड़ी सप्लाई रुकावट है और लगभग 25 दिनों की वैश्विक खपत के बराबर है।
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी की पहल
इस विकट स्थिति से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने अपने इमरजेंसी रिजर्व से लाखों बैरल तेल जारी करने की घोषणा की है। इस राहत कार्यक्रम में संयुक्त राज्य अमेरिका ने सबसे बड़ा योगदान देते हुए 172.20 मिलियन बैरल तेल देने का वादा किया है, जबकि जापान, कनाडा और दक्षिण कोरिया सहित कई अन्य देश भी इस संकट से उबारने के लिए आगे आए हैं।
भविष्य की गंभीर चुनौतियां
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि खाड़ी क्षेत्र से कच्चे तेल की आपूर्ति पूरी तरह ठप रहती है, तो स्थिति और भी भयानक हो सकती है। फिलहाल IEA के पास उपलब्ध सरकारी रिजर्व सीमित दिनों की कमी को ही पूरा कर सकता है, जिसके चलते आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतों में भारी उछाल आने की आशंका जताई जा रही है।

