
रतलाम। फर्जी फर्म और कूटरचित दस्तावेजों के जरिए बैंक से 17 लाख रुपए का ऋण हासिल कर उसका गलत इस्तेमाल करने के मामले में न्यायालय ने आरोपी जाकिर हुसैन को सात वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश आशीष श्रीवास्तव की अदालत ने आरोपी पर कुल 16 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया। मामले में उसकी पुत्री और सह-आरोपी ऐहतेशाम बानो फरार है।
प्रकरण माणकचौक थाने में वर्ष 2020 में दर्ज हुआ था। अभियोजन के अनुसार जाकिर हुसैन (55), निवासी पीएनटी कॉलोनी, ने अपनी पुत्री ऐहतेशाम बानो के साथ मिलकर प्रधानमंत्री रोजगार गारंटी योजना के तहत दौना-पत्तल निर्माण इकाई स्थापित करने के नाम पर 25 लाख रुपए के ऋण के लिए आवेदन किया था। बैंक की प्रक्रिया पूरी होने के बाद 17 लाख रुपए का ऋण स्वीकृत हुआ।
आरोपियों ने मशीनरी खरीदने के लिए इंदौर के सांवेर रोड स्थित ‘निक्की ट्रेडर्स’ के नाम से कोटेशन बैंक में प्रस्तुत किया। जांच में सामने आया कि दिए गए पते पर इस नाम की कोई फर्म ही मौजूद नहीं थी। इसके बाद जाकिर हुसैन ने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की रेलवे कॉलोनी शाखा में खुद को निक्की ट्रेडर्स का प्रोपराइटर बताते हुए बैंक खाता खुलवाया।
ऋण की 17 लाख रुपए की राशि इसी खाते में ट्रांसफर कराई गई। अभियोजन ने बैंक दस्तावेज, जब्ती पंचनामे और गवाहों के माध्यम से मामले को न्यायालय में साबित किया। अदालत ने जाकिर हुसैन को धोखाधड़ी, कूटरचना, जाली दस्तावेज को असली बताकर इस्तेमाल करने और आपराधिक षड्यंत्र से संबंधित धाराओं में दोषी माना। धारा 420, 467, 468, 471 और 120-बी भादंवि में क्रमश: 5, 7, 5, 7 और 5 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। कुल 16 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया गया।
अभियोजन की ओर से अपर लोक अभियोजक संजीव सिंह चौहान ने पैरवी की। न्यायालय के फैसले के बाद मुख्य आरोपी पिता को सजा हो गई है, जबकि सह-आरोपी बेटी ऐहतेशाम बानो अब भी फरार है।
