भारतीय ज्ञान परम्परा के समावेशन से सामाजिक समृद्धि और साँस्कृतिक सुदृढ़ता बढ़ेगी: राजपूत

सागर:समाजशास्त्र विषय में भारतीय ज्ञान परम्परा के समावेशन से विषय वस्तु में भारतीय आधार शिला के साथ ही सामाजिक समृद्धि, साँस्कृतिक सुदृढ़ता और व्यक्तित्व निर्माण के नये आयामों को नवीन दिशा और गति मिल सकेगी. हमको अपनी सुदृढ़ साँस्कृतिक विरासत को संजोने का एक नया अध्याय मिलेगा. जरूरत है गहन अध्ययन, अनुसंधान, लेखन और विमर्श की.” ये विचार दिये प्रोफेसर दिवाकर सिंह राजपूत ने भोपाल में एक कार्यशाला के उद्घाटन समारोह में. मध्य प्रदेश शासन उच्च शिक्षा विभाग भोपाल एवं बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय भोपाल द्वारा भारतीय ज्ञान परंपरा पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया.

“समाजशास्त्र विषय पाठ्यक्रम में भारतीय ज्ञान परम्परा का समावेशन” विषय पर केन्द्रित कार्यशाला के उद्घाटन समारोह में आमंत्रित अतिथि और विषय विशेषज्ञ के रूप में प्रोफेसर दिवाकर सिंह राजपूत ने विचार रखे. प्रो राजपूत ने कहा कि “समाजशास्त्र की विषय वस्तु और अध्ययन पद्धति को रि-विजिट करने की जरूरत है. हमें समाजशास्त्र को खोजना है और समाजशास्त्र को जीना है, तभी समाजशास्त्र को यथार्थ के धरातल पर पढ़ाया जाना सार्थक हो सकेगा”उद्घाटन समारोह में प्रोफेसर आर सी भारद्वाज, प्रो विवेक शर्मा, प्रो मनोज सिंह, प्रो दिनेश दवे, प्रो सी बी सिंह ने भी संबोधित किया. कार्यशाला में देश और प्रदेश के विभिन्न संस्थानों से विषय विशेषज्ञों ने सहभागिता की.

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