
श्री भूरिया ने कहा कि सरकार ने मृतक बच्चों के परिवारों को केवल 20 हजार रुपये की सहायता दी, जबकि गलती बच्चों की नहीं बल्कि उस व्यवस्था की है, जिसमें आदिवासी विकास के नाम पर हजारों करोड़ रुपये खर्च किए जाते हैं। उन्होंने विधानसभा में पूछे गए सवाल का हवाला देते हुए कहा कि कुपोषित बच्चों के लिए प्रतिदिन महज 12 रुपये का पोषण आहार दिया जाता है। महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में आदिवासी छात्रावास में सांप के काटने से तीन बच्चियों की मौत का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने कहा कि छात्रावास में 70 से अधिक बच्चियां जमीन पर सो रही थीं। उन्होंने दावा किया कि पिछले दो वर्षों में महाराष्ट्र के छात्रावासों में 550-600 बच्चों की मौत हुई है। श्री भूरिया ने बालाघाट और गढ़चिरौली मामलों की जांच के लिए विशेष कमेटी, दोषियों पर कार्रवाई और सभी आदिवासी छात्रावासों का अनिवार्य सेफ्टी ऑडिट कराने की मांग की।
