
श्री कार्नी ने शुक्रवार को जारी बयान में अमेरिकी प्रस्ताव की शर्तों में कथित अंतिम समय में किये गये बदलावों को ‘अनुचित’ और ‘आर्थिक रूप से अव्यावहारिक’ बताया था। उन्होंने कहा था कि इन बदलावों से किसी भी समझौते की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा होता है। उन्होंने यह भी कहा था कि कनाडा अपने श्रमिकों और कारोबारों की सुरक्षा के लिए अमेरिकी शुल्क का ‘डॉलर के बदले डॉलर’ जवाब देगा। श्री कार्नी ने शनिवार को एक भाषण में कहा, “हमारी जवाबी कार्रवाई इस्पात, डेयरी उत्पाद, घरेलू उपकरण, कृषि उपकरण, लुगदी और कागज तथा इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों पर केंद्रित होगी।”
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय ने घटनाक्रम को कनाडा के लिए ‘गंवाया हुआ अवसर’ करार दिया है। कार्यालय ने कहा कि कनाडा अमेरिका के खिलाफ लंबे समय से जारी जवाबी शुल्क को बनाए हुए है। कार्यालय ने सोशल मीडिया पर जारी एक बयान में कहा, “अमेरिका की ओर से कनाडा को हमारे बाजार में किसी भी बड़े निर्यातक की तुलना में सबसे बेहतर शर्तें देने के प्रस्ताव के बावजूद कनाडा की नयी मांगों और पहले किए गए कुछ वादों से पीछे हटने के कारण पिछले कुछ दिनों में तैयार किया गया संतुलन बिगड़ गया।”
व्यापार वार्ता का यह गतिरोध अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस उम्मीद के बावजूद आया है कि दोनों देश समझौते पर पहुंच सकते हैं। श्री ट्रंप ने समझौता होने की संभावना को देखते हुए शुल्क लागू करने की शुरुआती समय सीमा बुधवार से आगे बढ़ा दी थी। श्री ट्रंप ने कनाडा को बार-बार अमेरिका का ’51वां राज्य’ बनाने की बात कही है। उन्होंने रविवार तड़के कहा कि कनाडा ‘राज्य बने बिना राज्य होने के फायदे’ चाहता है।
उन्होंने कहा, “उन्होंने कई वर्षों तक हमारे किसानों पर भारी शुल्क लगाए हैं। जिसे अब और बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है।” श्री ट्रंप ने जनवरी 2025 से ही आक्रामक शुल्क नीति अपनाई है और दुनियाभर के व्यापारिक साझेदारों पर शुल्क बढ़ाये हैं। उनका प्रशासन दावा करता है कि शुल्कों से अमेरिकी विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा, घरेलू रोजगार बढ़ेंगे और उन व्यापारिक शर्तों का समाधान होगा जिन्हें वह अनुचित मानता है।
