साइबर ठगी की रकम का चीन कनेक्शन, 5 गिरफ्तार

सीहोर: साइबर ठगी की रकम को बैंक खातों से निकालकर नकदी में बदलने, फिर उसे क्रिप्टोकरेंसी (यूएसडीटी) में कन्वर्ट कर टेलीग्राम के जरिए चीन तक पहुंचाने वाले नेटवर्क का कोतवाली पुलिस ने खुलासा किया है. पुलिस ने इस मामले में अब तक पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक आरोपी फरार है. पूछताछ में ठगी की रकम को अलग-अलग स्तर पर आगे पहुंचाने के बदले कमीशन लिए जाने की बात सामने आई है। पुलिस अब पूरे नेटवर्क के मनी ट्रेल, डिजिटल लेनदेन और विदेशी कनेक्शन की जांच कर रही है.

मामला थाना कोतवाली में कंचन तोमर पति अजय सिंह तोमर की शिकायत पर दर्ज साइबर फ्रॉड प्रकरण से जुड़ा है। शिकायत के बाद पुलिस ने मामले को एनसीआरपी पोर्टल पर दर्ज कर मनी ट्रेल की तकनीकी जांच शुरू की. जांच में सामने आया कि शिकायतकर्ता के खाते से ठगी की रकम 9 और 10 अप्रैल 26 को अलग-अलग एटीएम से निकाली गई थी. तकनीकी विश्लेषण और स्थानीय मुखबिर तंत्र की मदद से पुलिस ने इंदौर के बाणगंगा निवासी गोपाल सेन और परदेशीपुरा निवासी सुमित कोष्ठी को गिरफ्तार किया। पूछताछ में दोनों ने पुलिस को बताया कि एटीएम से निकाली गई रकम वे आर्यन अम्बेडकर को सौंपते थे. इसके बदले उन्हें रकम का करीब 5 प्रतिशत कमीशन मिलता था.

गोपाल और सुमित से मिली जानकारी तथा साइबर सेल के तकनीकी सहयोग से पुलिस ने बाणगंगा निवासी आर्यन अम्बेडकर और उसके साथी ऋतेश प्रजापत को गिरफ्तार किया. पूछताछ में पुलिस के अनुसार आर्यन ने बताया कि वह साइबर ठगी से प्राप्त रकम से यूएसडीटी यानी क्रिप्टोकरेंसी खरीदता था. इसके बाद टेलीग्राम ग्रुप के माध्यम से यह यूएसडीटी मैटी नामक चीनी नागरिक को भेजा जाता था. इस काम के बदले उसे 10 प्रतिशत कमीशन मिलता था. यानी साइबर ठगी की रकम को सीधे बैंकिंग चैनल से आगे भेजने के बजाय उसे पहले एटीएम से नकद निकालकर, फिर क्रिप्टोकरेंसी में बदलने का तरीका अपनाया जा रहा था.

इससे पुलिस के लिए पारंपरिक बैंकिंग मनी ट्रेल के साथ-साथ डिजिटल एसेट ट्रांजेक्शन की जांच भी जरूरी हो गई है.आर्यन से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने इंदौर के हीरानगर थाना क्षेत्र निवासी अनुराग पटेल को हिरासत में लेकर पूछताछ की. पुलिस के अनुसार अनुराग ने भी साइबर फ्रॉड की रकम से यूएसडीटी खरीदकर टेलीग्राम के माध्यम से चीनी नागरिक मैटी को भेजने की बात स्वीकार की. पूछताछ के दौरान अनुराग ने इस नेटवर्क में शिवेंद्र सिंह राजपूत के शामिल होने की जानकारी भी पुलिस को दी. इसके बाद पुलिस ने शिवेंद्र की तलाश शुरू कर दी है और उसके संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है.
पुलिस के अनुसार मामले में अब तक गोपाल सेन, सुमित कोष्ठी, आर्यन अम्बेडकर, ऋतेश प्रजापत और अनुराग पटेल को गिरफ्तार किया जा चुका है. वहीं शिवेंद्र सिंह राजपूत फरार है। पुलिस उसके साथ ही नेटवर्क से जुड़े अन्य संभावित लोगों की भी जानकारी जुटा रही है. संभावना है कि पुलिस शीघ्र ही रहस्योद्घाटन कर सकती है.
डेटा से शुरू होता है ठगी का खेल
साइबर ठगी के ऐसे मामलों में लोगों के मोबाइल नंबर और व्यक्तिगत जानकारी तक ठगों की पहुंच भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है. जांच एजेंसियों के सामने यह सवाल भी रहता है कि आखिर ठगों तक संभावित पीडि़तों का मोबाइल नंबर और अन्य डेटा पहुंचता कहां से है. सीहोर में पूर्व में भी एक मामले में ब्लड डोनेशन डायरेक्ट्री में दर्ज मोबाइल नंबरों के इस्तेमाल से ठगी की बात सामने आ चुकी है. ऐसे मामलों को देखते हुए डेटा की अवैध बिक्री और उसके इस्तेमाल की भी जांच जरूरी हो जाती है। हालांकि इस प्रकरण में किसी विशेष डेटा कंपनी की भूमिका की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगी. साइबर ठगी के निवेश आधारित मामलों में आमतौर पर ठग पहले लोगों को छोटे निवेश का लालच देते हैं. शुरुआत में उन्हें मुनाफा दिखाकर भरोसा कायम किया जाता है. इसके बाद पीडि़त को बड़े निवेश के लिए तैयार किया जाता है. जब व्यक्ति अधिक रकम निवेश कर देता है, तब निकासी के नाम पर अलग-अलग शुल्क और टैक्स की मांग शुरू हो जाती है और अंतत: रकम ठग ली जाती है.
पुलिस के लिए नया चुनौतीपूर्ण ट्रैक
बैंक खाते में आने वाली ठगी की रकम पर पुलिस और बैंकिंग सिस्टम की नजर होने के कारण साइबर अपराधी लगातार रकम को आगे पहुंचाने के नए तरीके अपना रहे हैं। इस मामले में एटीएम से नकदी निकालना और फिर यूएसडीटी के जरिए रकम को विदेश तक पहुंचाना पुलिस के लिए जांच की एक नई और महत्वपूर्ण कड़ी बनकर सामने आया है. अब पुलिस टेलीग्राम ग्रुप, यूएसडीटी ट्रांजेक्शन, डिजिटल वॉलेट, मनी ट्रेल और विदेशी कनेक्शन की तकनीकी जांच कर रही है. माना जा रहा है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ और डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद नेटवर्क से जुड़े और लोगों के नाम सामने आ सकते हैं

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