जेआईआईटी नोएडा में वीएलएसआई डिज़ाइन एंड टेस्ट (वीडीएटी 2026) की 30वीं अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ

नोएडा: वीएलएसआई डिज़ाइन एंड टेस्ट (VDAT 2026) की 30वीं अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आज जेपी इंस्टीट्यूट ऑफ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (जेआईआईटी), नोएडा में शुभारंभ हुआ। तीन दिवसीय यह अंतरराष्ट्रीय आयोजन 20 से 22 अगस्त 2026 तक “एडवांसिंग इंटेलीजेंट, सिक्योर एंड क्वांटम-रेडी सेमीकंडक्टर सिस्टम्स फॉर द नेक्स्ट एरा ऑफ़ कंप्यूटिंग ” विषय पर आयोजित किया जा रहा है। संगोष्ठी में देश-विदेश के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, सेमीकंडक्टर उद्योग के विशेषज्ञों, नीति-निर्माताओं, स्टार्ट-अप प्रतिनिधियों और विद्यार्थियों की भागीदारी है।

वीडीएटी 2026 का आयोजन जेआईआईटी द्वारा दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (डीटीयू ), इंद्रप्रस्थ इंस्टिट्यूट ऑफ़ इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी दिल्ली (आईआईटी – दिल्ली ), इंदिरा गाँधी दिल्ली टेक्निकल यूनिवर्सिटी फॉर वीमेन (आईजीडीटीयूडब्लू ) , नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी दिल्ली (एनआईटी दिल्ली ) तथा नेताजी सुभास यूनिवर्सिटी ऑफ़ टेक्नोलॉजी (एनएसयूटी) के सहयोग से तथा वीएलएसआई सोसाइटी ऑफ़ इंडिया (वीएसआई) और आईइइइ उत्तर प्रदेश सेक्शन के समर्थन से किया जा रहा है। वीडीएटी पिछले तीन दशकों से वीएलएसआई डिजाइन, सेमीकंडक्टर प्रौद्योगिकी, परीक्षण, ईडीए, एम्बेडेड सिस्टम और उभरती कंप्यूटिंग प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में शिक्षा, अनुसंधान और उद्योग को जोड़ने वाला प्रमुख मंच रहा है।

वीडीएटी के 30वें संस्करण का आयोजन विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके 30 वर्ष के इतिहास में पहली बार यह प्रतिष्ठित संगोष्ठी उत्तर प्रदेश में आयोजित की जा रही है। इसका आयोजन नोएडा-ग्रेटर नोएडा क्षेत्र के इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, डेटा-सेंटर और उन्नत-विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र में बढ़ते महत्व को रेखांकित करता है। यह आयोजन उत्तर प्रदेश में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, सेमीकंडक्टर निवेश, नवाचार, स्टार्ट-अप विकास और उच्च-प्रौद्योगिकी रोजगार की प्रमुखता को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय अनुसंधान और उद्योग जगत से जोड़ने का महत्वपूर्ण अवसर भी प्रदान कर रहा है।

उद्घाटन समारोह में भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) के वैज्ञानिक-जी और समूह संयोजक, अनुसंधान एवं विकास प्रभाग, सुश्री सुनीता वर्मा मुख्य अतिथि और सेमी-कंडक्टर प्रयोगशाला (एससीएल), मोहाली के महानिदेशक, डॉ. कमलजीत सिंह विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर प्रो. एस. सी. सक्सेना, प्रो-चांसलर, जेआईआईटी; प्रो. श्वेता श्रीवास्तव, निदेशक, जेआईआईटी एवं जनरल चेयर, वीडीएटी 2026; डॉ. सत्या गुप्ता, अध्यक्ष, वीएलएसआई सोसाइटी ऑफ इंडिया; चित्रा हरिहरन, सचिव, वीएलएसआई सोसाइटी ऑफ इंडिया; प्रो. प्रतीक शर्मा, कुलपति, डीटीयू; तथा प्रो. रंजना झा, कुलपति, आईजीडीटीयूडब्ल्यू सहित कई अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

अपने उद्घाटन में सहायक सुनीता वर्मा ने भारत के सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र को चिप डिजाइन, निर्माण, उन्नत पैकेजिंग, परीक्षण, सामग्री, उपकरण और बौद्धिक संपदा के क्षेत्र में मजबूती की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने एआई, एज कंप्यूटिंग, हार्डवेयर सुरक्षा, विषम एकीकरण, चिपलेट्स, सिलिकॉन फोटोनिक्स और क्वांटम टेक्नोलॉजीज जैसे उभरते अवशेषों के महत्व को देखते हुए उत्तर प्रदेश में सरकार, शिक्षा, उद्योग, स्टार्ट-अप और अनुसंधान संस्थानों के बीच सहयोग को आवश्यक बताया।

डॉ. कमलजीत सिंह ने भारत की स्वदेशी सेमीकंडक्टर क्षमताओं को मजबूत करने और अनुसंधान, डिजाइन, निर्माण और प्रौद्योगिकी परिनियोजन को जोड़ने वाले इकोसिस्टम के विकास के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने सेमीकंडक्टर इनोवेशन को गति देने और रणनीतिक और उभरते प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में भारत की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए शिक्षा, उद्योग और सरकार के बीच मजबूत सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया।

वीएलएसआई सोसायटी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. सत्या गुप्ता ने वीडीएटी के तीन दशकों के सफर को रेखांकित करते हुए इसे शोधकर्ताओं, उद्योग विशेषज्ञों और छात्रों के लिए वीएलएसआई डिजाइन, सेमीकंडक्टर प्रौद्योगिकियों, परीक्षण और सिस्टम डिजाइन में नवीनतम विचारों और शोध के आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण मंच बताया। उन्होंने एआई, उन्नत सेमीकंडक्टर प्रौद्योगिकियां, सुरक्षित हार्डवेयर, विषम एकीकरण और क्वांटम कंप्यूटिंग के संदर्भ में वीडीएटी 2026 की विषयवस्तु पर भी प्रकाश डाला।

उद्घाटन कार्यक्रम में प्रो. एस.सी.सक्सेना, डॉ. सत्या गुप्ता, चित्रा हरिहरन, डॉ. कमलजीत सिंह, सुश्री सुनीता वर्मा और एनएक्सपी सेमीकंडक्टर्स के उपाध्यक्ष और भारत के प्रबंध निदेशक, श्री हितेश गर्ग ने संबोधित किया। कार्यक्रम में सिनोप्सिस के वीपी-आरएंडडी इंजीनियरिंग, आईपी ग्रुप, श्री अमित खनूजा द्वारा सिनोप्सिस- जेआईआईटी टेपआउट इनिशिएटिव पर प्रस्तुति दी गई। इस अवसर पर वीडीएटी 2026 की कार्यवाही का विमोचन और कैडेंस डिजाइन सिस्टम्स की ग्लोबल एकेडमिक नेटवर्क, सुश्री ताल जिगमैन द्वारा कैडेंस-सर्टिफाइड लेबोरेटरी का उद्घाटन भी किया गया।

तकनीकी कार्यक्रम में देश-विदेश के प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल हैं, जिनमें प्रो. मरियम शोजेई बाघिनी (आईआईटी बॉम्बे), प्रो. राजेंद्र सिंह (आईआईटी दिल्ली), प्रो. सैबल मुखोपाध्याय (जॉर्जिया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, यूएसए), प्रो. योगेश एस. चौहान (आईआईटी कानपुर), डॉ. गौरी शंकर कर (आईएमईसी, बेल्जियम), डॉ. हरि शंकर गुप्ता (इसरो), सुश्री ताल ज़िगमैन (कैडेंस डिज़ाइन सिस्टम), इंजीनियर एच. एस. जटाना (पूर्व वैज्ञानिक-जी, सेमीकंडक्टर प्रयोगशाला), श्री हितेश गर्ग (एनएक्सपी सेमीकंडक्टर्स), श्री आनंद कुमार (एसटीमाइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स), श्री योगेश मित्तल (रेनेसस इलेक्ट्रॉनिक्स) और श्री नवीन बिश्नोई (मार्वल) प्रमुख हैं।

वीडीएटी 2026 के लिए 78 शोधार्थियों से कुल 441 शोध पत्र प्राप्त हुए, जिनमें से 122 शोधपत्र स्वीकृत हुए, जिससे 27.7 प्रतिशत स्वीकृति दर रही। तकनीकी कार्यक्रम में सात प्रमुख ट्रैक के तहत सर्किट और एसओसी डिजाइन, एम्बेडेड सिस्टम, एआई हार्डवेयर और डिजाइन ऑटोमेशन, उभरते सेमीकंडक्टर डिवाइस, उन्नत एकीकरण, हार्डवेयर सुरक्षा, उन्नत मेमोरी आर्किटेक्चर और क्वांटम- रेडी प्रौद्योगिकियां जैसे समसामयिक विषयों पर शोध प्रस्तुत किए जा रहे हैं।

तीन दिवसीय संगोष्ठी में मुख्य भाषण, आमंत्रित वार्ता, ट्यूटोरियल, पीएचडी फोरम, स्टार्टअप/चिप्प्रेन्योर गतिविधियां, पोस्टर सत्र और उद्योग-अकादमिक बातचीत भी आयोजित की जा रही हैं। एनएक्सपी सेमीकंडक्टर, कैडेंस, सिनोप्सिस, एसटीएमइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स और रेनेसस जैसी प्रमुख प्रौद्योगिकी कंपनियों के विशेषज्ञों की भागीदारी से यह इवेंट रिसर्च, उद्योग और शिक्षा जगत के बीच संवाद को और मजबूत कर रहा है।

वीडीएटी 2026 का आयोजन जेआईआईटी नोएडा और दिल्ली-एनसीआर अकादमिक कंसोर्टियम के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह आयोजन क्षेत्र की शैक्षणिक और तकनीकी क्षमताओं को चित्रित करने के साथ-साथ भारत के तेजी से विकसित हो रहे सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स पारिस्थितिकी तंत्र के साथ नए सहयोग के अवसरों को मजबूत कर रहा है। आयोजन के सफल संचालन में योगदान देने वाले सभी प्रतिष्ठित वक्ताओं, भाग लेने वाले संस्थानों, उद्योग भागीदारों, शोधकर्ताओं, समीक्षकों, छात्रों और स्वयंसेवकों के प्रति आयोजकों ने आभार व्यक्त किया।

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