वाशिंगटन, 22 अगस्त (वार्ता) अमेरिका और कुवैत ने समुद्री सुरक्षा, एकीकृत वायु एवं मिसाइल रक्षा तथा मानवरहित विमानों से बढ़ते खतरे से निपटने के लिए रक्षा सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति जतायी है। अमेरिकी युद्ध विभाग ने यह जानकारी दी।
यह सहमति 19-20 अगस्त को पेंटागन में हुई 16वीं अमेरिका-कुवैत संयुक्त सैन्य आयोग (जेएमसी) की बैठक में बनी। बैठक की सह-अध्यक्षता अमेरिकी युद्ध विभाग में निकट पूर्व और मध्य एशिया के लिए उप सहायक रक्षा मंत्री माइकल पी. डिमिनो चतुर्थ और कुवैत के चीफ ऑफ जनरल स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल खालिद अल-शरियान ने की।
बैठक में अमेरिकी केंद्रीय कमान, ज्वाइंट स्टाफ, मैरीलैंड नेशनल गार्ड और विदेश विभाग के प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया।
दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों का आकलन साझा किया और साझा खतरों से निपटने के लिए कुवैत की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के उपायों पर चर्चा की। दोनों देशों ने द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए परिचालन स्तर की कार्ययोजनाओं को भी अंतिम रूप दिया।
वार्ता में सैन्य बलों के बीच बेहतर तालमेल, समुद्री सुरक्षा सहयोग के विस्तार तथा क्षेत्रीय एकीकृत वायु एवं मिसाइल रक्षा व्यवस्था को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया। दोनों पक्षों ने आधुनिक युद्ध में मानवरहित विमान प्रणालियों की बढ़ती भूमिका और इनके खतरे से निपटने के लिए रक्षा प्रणालियों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर भी चर्चा की।
कुवैत अमेरिका से अपनी रक्षा खरीद बढ़ाने की भी योजना बना रहा है। अमेरिका के अनुसार, कुवैत द्वारा करीब 1.98 अरब डॉलर में छोटे मानवरहित विमानों से निपटने वाली एंडुरिल प्रणालियों की खरीद का प्रस्ताव लंबित है। यह कुवैत की विदेशी सैन्य खरीद बढ़ाने की व्यापक योजना का हिस्सा है।
प्रतिनिधिमंडलों ने अमेरिका की ‘अमेरिका फर्स्ट आर्म्स ट्रांसफर स्ट्रैटेजी’ और विदेशी सैन्य बिक्री की प्रक्रिया को सरल बनाने तथा कुवैत के सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण में तेजी लाने के उपायों पर भी चर्चा की।
बैठक के दौरान डिमिनो ने औपचारिक रूप से कुवैत के अमेरिकी स्टेट पार्टनरशिप प्रोग्राम में शामिल होने की घोषणा की। इस कार्यक्रम के तहत कुवैत की साझेदारी मैरीलैंड नेशनल गार्ड के साथ होगी। जेएमसी में मैरीलैंड नेशनल गार्ड का प्रतिनिधित्व एडजुटेंट जनरल मेजर जनरल जनीन बिर्कहेड ने किया।
अमेरिका और कुवैत ने कहा कि बैठक दोनों देशों के बीच मजबूत, पारस्परिक और दीर्घकालिक रक्षा साझेदारी के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
