भुवनेश्वर, (वार्ता) ओडिशा सरकार तालचेर-बिमलागढ़ नयी ब्रॉड गेज रेलवे परियोजना के लिए बाकी बची जमीन के अधिग्रहण में तेजी लाएगी और अधिग्रहित जमीन को बिना किसी रुकावट के रेलवे को सौंपने की प्रक्रिया को सुचारु बनाएगी।
राजस्व सचिव अरबिंद पाढ़ी ने 149.78 किलोमीटर लंबी रेलवे परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण की स्थिति, लंबित अदालती मामलों और निर्माण को प्रभावित करने वाले अन्य प्रमुख मुद्दों की विस्तृत समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की।
बैठक के दौरान श्री पाढ़ी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि बाकी बची जमीन के अधिग्रहण की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए और उसे समय पर रेलवे अधिकारियों को सौंपना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया में जनहित को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
वर्ष 2003-04 में मंजूर इस परियोजना के लिए कुल 2,144.028 एकड़ जमीन की जरूरत है। अब तक 1,868.357 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया जा चुका है, जबकि 275.671 एकड़ जमीन का अधिग्रहण अभी बाकी है।
बाकी बची जमीन में 202.15 एकड़ निजी जमीन, 13.7 एकड़ वन भूमि और 59.821 एकड़ सरकारी जमीन शामिल है।
वन भूमि के लिए स्टेज-I वन मंजूरी की प्रक्रिया इस समय चल रही है। वहीं, सरकारी जमीन के लिए मंजूरी और उसे रेलवे परियोजना के लिए देने की प्रक्रिया भी जारी है। यह रेलवे लाइन अंगुल, देवगढ़ और सुंदरगढ़ जिलों से होकर गुजरेगी।
बैठक में बाकी बची जमीन के अधिग्रहण, मुआवजे के भुगतान, लंबित अदालती मामलों और अधिग्रहित जमीन को सही तरीके से रेलवे को सौंपने के उपायों की विस्तार से समीक्षा की गयी।
श्री पाढ़ी ने कहा कि सभी संबंधित विभागों और अधिकारियों के बीच बेहतर तालमेल से जमीन अधिग्रहण से जुड़े मामलों को जल्द से जल्द सुलझाने में मदद मिलेगी और परियोजना के काम में तेजी आएगी।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जमीन का हस्तांतरण नियमों के अनुसार और बिना किसी अनावश्यक रुकावट के किया जाए तथा पूरी प्रक्रिया में जनहित को सबसे आगे रखा जाए।
तालचेर-बिमलागढ़ रेलवे परियोजना से ओडिशा के आर्थिक रूप से पिछड़े इलाकों में रेल संपर्क बेहतर होने की उम्मीद है। इससे यात्रियों और सामान की आवाजाही आसान होगी और क्षेत्र के आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।
