सीहोर। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सख्त निर्देशों के बाद चलाए जा रहे शुद्ध के खिलाफ युद्ध अभियान के बावजूद जिले में नकली और मिलावटी खाद्य पदार्थों का कारोबार थमता नजर नहीं आ रहा है. पचामा गांव स्थित रुद्रांश डेयरी पर खाद्य सुरक्षा विभाग की देर रात हुई छापामार कार्रवाई ने एक बार फिर जिले में चल रहे मिलावट के खेल पर सवाल खड़े कर दिए हैं. संयुक्त टीम ने यहां से करीब 25 क्विंटल संदिग्ध एनालॉग पनीर जब्त कर पूरा स्टॉक सील किया है. सबसे गंभीर बात यह है कि एक सप्ताह के भीतर इसी प्रतिष्ठान पर यह दूसरी बड़ी कार्रवाई है.
संभागीय उडऩदस्ता और खाद्य एवं औषधि प्रशासन सीहोर की संयुक्त टीम ने उडऩदस्ता प्रभारी पंकज श्रीवास्तव के नेतृत्व में कार्रवाई की. जांच के दौरान पैकेटों पर कंपनी का नाम और पता स्पष्ट रूप से अंकित नहीं पाया गया. मौके से बड़ी मात्रा में नमक और शक्कर भी मिलने की जानकारी सामने आई है. अधिकारियों ने संदिग्ध पनीर के नमूने जांच के लिए भेजे हैं. प्रयोगशाला रिपोर्ट के आधार पर विभाग द्वारा आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी.
इधर शहर और जिले में कुकुरमुत्तों की तरह उभर रही छोटी-बड़ी दुग्ध उत्पाद डेयरियां भी खाद्य सुरक्षा विभाग की निगरानी पर सवाल खड़े कर रही हैं. बाजार में खुलेआम बिक रहे घी, पनीर, मावा, दूध, चक्का सहित अन्य दुग्ध उत्पादों की नियमित और प्रभावी जांच की जरूरत है. सवाल यह है कि खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम कितनी दुकानों और डेयरियों से नियमित नमूने ले रही है और कितने मामलों में कार्रवाई की गई है. एक ही प्रतिष्ठान पर एक सप्ताह में दूसरी बड़ी कार्रवाई सामने आना इस बात का संकेत है कि केवल छापेमारी से काम नहीं चलेगा. विभाग को जिलेभर में डेयरियों, दूध विक्रेताओं, मिठाई दुकानों और दुग्ध उत्पाद बनाने वाली इकाइयों का व्यापक सर्वे कर नियमित सैंपलिंग करनी होगी. साथ ही मिलावट साबित होने पर सिर्फ माल जब्त करने के बजाय जिम्मेदार लोगों के खिलाफ ऐसी सख्त कार्रवाई जरूरी है, जिससे मिलावट का कारोबार करने वालों में वास्तविक खौफ पैदा हो.
कम लागत से बना नकली पनीर बिकता महंगा
जानकारी के अनुसार एनालॉग पनीर को असली दूध से बने पनीर के विकल्प के तौर पर तैयार कर बाजार में खपाए जाने की आशंका है. इसमें पाम ऑयल अथवा अन्य वनस्पति तेल, स्टार्च, स्किम्ड मिल्क पाउडर और दूसरे पदार्थों के इस्तेमाल की बात सामने आई है. कम लागत में तैयार इस उत्पाद को बाजार में असली पनीर बताकर कई गुना कीमत पर बेचकर मोटा मुनाफा कमाया जा रहा था. सूत्रों की मानें तो कथित तौर पर 80 से 100 रुपये किलो की लागत वाला उत्पाद 300 से 400 रुपये किलो तक में खपाया जा रहा था. यदि जांच में यह पाया जाता है तो मामला केवल मिलावट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उपभोक्ताओं से धोखाधड़ी और खाद्य सुरक्षा कानूनों के गंभीर उल्लंघन का भी बन सकता है.
आष्टा में भी पकड़ाया था नकली घी का कारखाना
जिले में मिलावट का यह कोई पहला मामला नहीं है. करीब तीन महीने पहले आष्टा में नकली सांची घी तैयार करने का कारखाना पकड़ा गया था. इस दौरान बड़ी संख्या में सांची घी के खाली रैपर और घी बरामद किया गया था. कार्रवाई की भनक लगते ही आरोपी मौके से भागने में कामयाब हो गया था. बताया गया कि वह आरोपी अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर है. ऐसे मामलों मेंआरोपियों का लंबे समय तक पुलिस की पकड़ से दूर रहना भी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है.
