धर्मशाला, (वार्ता) हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री शांता कुमार ने गुरुवार को कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज़ादी की लड़ाई के दौरान लाखों भारतीयों को प्रेरित करने वाला राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ स्वतंत्रता के 80 साल बाद विवाद का विषय बन गया है।
श्री कुमार ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ आज़ादी के आंदोलन का एक शक्तिशाली मंत्र था और इसने करोड़ों भारतीयों को आज़ादी की लड़ाई में शामिल होने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने अब इस गीत को विवाद का विषय बना दिया है।
उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक रिकॉर्ड बताते हैं कि 1937 तक ‘वंदे मातरम्’ को पूरा गाया जाता था और कांग्रेस नेता भी इसे पूरा गाते थे।
उनके अनुसार, बाद में मुहम्मद अली जिन्ना ने इस गीत का विरोध किया, जिसके बाद कांग्रेस के कार्यक्रमों में इस गीत के दो पद गाना बंद कर दिया गया।
इंडोनेशिया का उदाहरण देते हुए श्री कुमार ने कहा कि भले ही इंडोनेशिया मुस्लिम-बहुल देश है, लेकिन वहां रामलीला और हिंदू मंदिरों जैसी चीज़ों में उसकी हिंदू सांस्कृतिक विरासत की झलक आज भी मिलती है।
उन्होंने एक किस्सा याद किया जिसमें इंडोनेशिया गए एक भारतीय मंत्री ने वहां के एक मुस्लिम मंत्री से पूछा था कि मुस्लिम आबादी वाला देश होने के बावजूद वहां रामलीला क्यों होती है। उन्होंने बताया कि इंडोनेशियाई मंत्री ने जवाब दिया था कि उनके पूर्वजों ने पूजा का तरीका तो बदला था, लेकिन अपनी संस्कृति या विरासत को नहीं बदला था।
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खरगे और श्रीमती सोनिया गांधी को पूरा ‘वंदे मातरम्’ गाने से क्या आपत्ति हो सकती है। उन्होंने कहा कि अगर इंडोनेशिया अपनी सांस्कृतिक परंपराओं को बचाकर रख सकता है, तो भारत को भी अपनी विरासत का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि वे कांग्रेस नेताओं को सही समझ दें।
