नई दिल्ली, भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व बल्लेबाज जैकब मार्टिन को एक दशक से अधिक पुराने कानूनी संघर्ष के बाद बड़ी राहत मिली है। पटियाला हाउस कोर्ट ने साल 2004 में दर्ज किए गए फर्जी यूके इमिग्रेशन स्टांप और वित्तीय लेनदेन से जुड़े मामले में मार्टिन के खिलाफ कोई भी ठोस और भरोसेमंद सबूत न मिलने पर उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया है। अदालत में पेश किए गए गवाह भी इन आरोपों को साबित करने में विफल रहे।
संघर्ष और व्यक्तिगत क्षति
जैकब मार्टिन ने इस पूरे मामले को लेकर साझा किया कि शुरुआती एफआईआर में उनका नाम शामिल नहीं था, लेकिन एक प्रसिद्ध खिलाड़ी होने के कारण उन्हें इस विवाद में घसीटा गया। इस लंबी कानूनी प्रक्रिया और मानसिक तनाव के बीच उन्हें अपनी रेलवे की नौकरी से भी हाथ धोना पड़ा था। कोर्ट से क्लीन चिट मिलने के बाद उन्होंने इसे अपने जीवन का एक बड़ा मोड़ बताया है।
क्रिकेट करियर की पृष्ठभूमि
घरेलू क्रिकेट में बड़ौदा, असम और रेलवे जैसी टीमों का प्रतिनिधित्व करने वाले जैकब मार्टिन ने सितंबर 1999 से अक्टूबर 2001 के बीच भारत के लिए कुल 10 वनडे मुकाबले खेले थे। इन अंतरराष्ट्रीय मैचों की 8 पारियों में उन्होंने कुल 158 रन बनाए थे। अब कानूनी बाधाओं से मुक्त होने के बाद उनके जीवन में एक नई शुरुआत हुई है।

