मुरादाबाद, 20 अगस्त (वार्ता) वैश्विक आर्थिक चुनौतियों और बढ़ती लागत से जूझ रहे निर्यात उद्योग को राहत देने के उद्देश्य से इंडिया एक्सपो मार्ट ने निर्यातकों के लिए 6,000 रुपये प्रति वर्ग मीटर की विशेष सब्सिडी देने का निर्णय लिया है। इस योजना का लाभ आगामी अक्टूबर और मार्च में आयोजित होने वाले व्यापार मेलों में भाग लेने वाले निर्यातकों को मिलेगा।
इंडिया एक्सपो मार्ट के मुख्य मार्गदर्शक एवं एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल फॉर हैंडीक्राफ्ट्स (ईपीसीएच) की चेयरमैन एडमिनिस्ट्रेशन कमेटी के अध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार के नेतृत्व में लिया गया यह निर्णय निर्यात क्षेत्र को प्रोत्साहन देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
वर्तमान समय में निर्यातकों को कच्चे माल की बढ़ती कीमतों, वित्तीय दबाव, वैश्विक बाजार में अनिश्चितता तथा परिचालन संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में सब्सिडी की यह घोषणा उन्हें आर्थिक राहत प्रदान करने के साथ-साथ व्यापार मेलों में उनकी भागीदारी बढ़ाने में सहायक हो सकती है।
मुरादाबाद हैंडीक्राफ्ट्स एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष नवेद उर रहमान ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में यह सब्सिडी निर्यातकों के लिए महत्वपूर्ण सहारा साबित होगी। उन्होंने कहा कि बढ़ती लागत और अंतरराष्ट्रीय बाजार की अनिश्चितताओं के बीच यह कदम उद्योग जगत का मनोबल बढ़ाने वाला है।
डॉ. राकेश कुमार ने कहा कि निर्यात उद्योग देश की आर्थिक वृद्धि का एक महत्वपूर्ण आधार है। निर्यातकों को अधिकतम सहयोग प्रदान करना और उन्हें वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूत बनाना प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि ईपीसीएच और इंडिया एक्सपो मार्ट निर्यातकों की समस्याओं को समझते हुए उद्योग को नई ऊर्जा देने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं।
इसी क्रम में निर्यात उद्योग से जुड़े मुद्दों और चुनौतियों पर चर्चा के लिए यंग एंटरप्रेन्योर सोसाइटी (यस) और मुरादाबाद हैंडीक्राफ्ट्स एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में 21 अगस्त को दोपहर तीन बजे ईपीसीएच हाउस, मुरादाबाद में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाएगी।
नवेद उर रहमान ने कहा कि निर्यात उद्योग इस समय कच्चे माल की बढ़ती लागत, वित्तीय दबाव और स्थानीय स्तर की परिचालन बाधाओं जैसी गंभीर समस्याओं से गुजर रहा है। ऐसे में उद्योग को मजबूत समर्थन और स्पष्ट नीतिगत समाधान की आवश्यकता है।
यंग एंटरप्रेन्योर सोसाइटी की ओर से भी कहा गया कि युवा उद्यमियों और नए निर्यातकों को वर्तमान कारोबारी माहौल में अतिरिक्त मार्गदर्शन, वित्तीय सहायता और सरल नीतिगत प्रक्रियाओं की आवश्यकता है, ताकि निर्यात क्षेत्र की दीर्घकालिक स्थिरता और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को मजबूत किया जा सके।
