
मंत्रालय के प्रशिक्षण निदेशक राकेश कुमार ने कहा कि मिशन कर्मयोगी पारंपरिक नियम-आधारित व्यवस्था से आगे बढ़कर भूमिका-आधारित, दक्षता-केंद्रित और क्षमता निर्माण पर आधारित सिविल सेवा विकास की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव है। उन्होंने कहा कि एमडीओ की भूमिका संस्थानों की क्षमता निर्माण आवश्यकताओं की पहचान करने, उपयुक्त प्रशिक्षण उपलब्ध कराने और कर्मचारियों में निरंतर पेशेवर विकास की संस्कृति विकसित करने में महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि मंत्रालय में अब तक 21,927 पाठ्यक्रम नामांकन और 17,660 पाठ्यक्रम पूर्ण किए जा चुके हैं। उन्होंने जोर दिया कि क्षमता निर्माण का उद्देश्य केवल पाठ्यक्रम पूरा करना नहीं, बल्कि कार्यस्थल पर दक्षता और सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार लाना होना चाहिए।
कर्मयोगी भारत के मुख्य परिचालन अधिकारी राकेश वर्मा ने कोविड-19 महामारी का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वास्थ्य मंत्रालय और उससे जुड़े संगठनों के करीब 11 लाख कर्मचारियों, जिनमें डॉक्टर और नर्स भी शामिल थे, को कोविड प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं पर प्रशिक्षित किया गया। उन्होंने कहा कि भविष्य में सभी फ्रंटलाइन स्वास्थ्यकर्मियों को इंटीग्रेटेड गवर्नमेंट ऑनलाइन ट्रेनिंग (आईगोट) से जोड़ने तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता, बहुभाषी पाठ्यक्रम और तकनीक के इस्तेमाल से प्रशिक्षण को अधिक सुलभ और व्यक्तिगत बनाने पर ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि भारत ने मॉरीशस के साथ समझौता ज्ञापन किया है और कई लैटिन अमेरिकी तथा सार्क देशों के साथ क्षमता निर्माण के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं पर काम कर रहा है।
क्षमता निर्माण आयोग की सदस्य डॉ. अलका मित्तल ने कहा कि मिशन कर्मयोगी के तहत क्षमता निर्माण का उद्देश्य केवल कौशल विकसित करना नहीं, बल्कि सही सोच, जवाबदेही और नागरिक-केंद्रित कार्य संस्कृति को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि आयोग की स्थापना के समय करीब 3.3 करोड़ केंद्रीय और राज्य सरकार के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के प्रदर्शन में सुधार, उनमें जवाबदेही की भावना विकसित करना और नागरिक-केंद्रित सार्वजनिक सेवा को मजबूत करना प्रमुख लक्ष्य निर्धारित किये गये थे।
