सिंगरौली। पावर ग्रिड कंपनी द्वारा किसानों की पट्टे की भूमि पर टावर लाइन लगाए जाने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। कंपनी की कार्यप्रणाली और मुआवजा प्रक्रिया से नाराज पांच गांवों के किसानों ने हाईकोर्ट जाने की तैयारी शुरू कर दी है।
किसानों का आरोप है कि उनकी आपत्तियों और भूमि संबंधी अधिकारों की अनदेखी करते हुए टावर लाइन का काम आगे बढ़ाया जा रहा है। मामले को लेकर प्रशासनिक स्तर पर भी शिकायत पहुंची है, जिसके बाद कलेक्टर ने पावर ग्रिड के अधिकारियों को फटकार लगाते हुए निर्धारित मुआवजा तय किए बिना काम शुरू नहीं करने के निर्देश दिए हैं। जानकारी के अनुसार चितरबई कला, बिहरा, गहिलरा, गदसा सहित आसपास के गांवों में टावर लाइन का कार्य प्रस्तावित है। प्रभावित किसानों का कहना है कि उनकी पट्टे की जमीन से लाइन निकाली जा रही है, जिससे खेती और जमीन के उपयोग पर असर पड़ेगा। किसानों ने कंपनी से नियमानुसार उचित मुआवजा और स्पष्ट प्रक्रिया अपनाने की मांग की है। मुआवजे को लेकर भी किसानों में असंतोष है। ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनी के अधिकारी अलग-अलग किसानों के सामने अलग-अलग राशि का प्रस्ताव रख रहे हैं। कहीं 25 लाख रुपए तो कहीं 13 से 14 लाख और 12 से 13 लाख रुपए तक की राशि बताए जाने की बात सामने आई है। इससे किसानों में कंपनी की मुआवजा प्रक्रिया को लेकर संदेह गहरा गया है। किसानों का कहना है कि जब तक प्रत्येक प्रभावित भूमि का मूल्यांकन कर लिखित रूप से मुआवजा तय नहीं किया जाताए, तब तक टावर लगाने का काम शुरू नहीं किया जाना चाहिए। बताया जा रहा है कि प्रशासनिक नोटिस के बाद मामला और गंभीर हो गया है।
उच्च न्यायालय में दायर की जाएगी याचिका
न्यायालय की शरण लेने की तैयारी शुरू कर दी है। किसानों का कहना है कि यदि उनकी मांगों का प्रशासनिक स्तर पर समाधान नहीं हुआ तो हाईकोर्ट में याचिका दायर की जाएगी। किसानों का सवाल है कि जब जमीन पर उनका वैध पट्टा और खेती का अधिकार है, तो बिना उचित मुआवजा तय किए कंपनी को टावर लाइन का काम शुरू करने की अनुमति कैसे दी जा सकती है। अब पूरे मामले में प्रशासन और पावर ग्रिड कंपनी की अगली कार्रवाई पर किसानों की नजर है।
