
ग्वालियर। ग्वालियर साहित्य संस्थान एवं लोकमंगल के संयुक्त तत्वावधान में महाकवि गोस्वामी तुलसीदास की जयंती पर लोकमंगल साहित्य सम्मान एवं कवि सम्मेलन का आयोजन लश्कर स्थित कमलादेव हाउस, रायसिंह का बाग में हुआ।
*माँ सरस्वती वंदना और राम स्तुति के साथ शुभारंभ*
समारोह की शुरुआत वैदिक परंपरा के अनुसार दीप प्रज्ज्वलन तथा माँ शारदा, महाकवि तुलसीदास एवं दिवंगत महाकवि स्व. पं. रामप्रकाश ‘अनुरागी’ के चित्रों पर माल्यार्पण कर की गई। इसके उपरांत प्रवीण कमठान ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। वहीं, कथक नृत्यांगना अनुभूति दुबे द्वारा प्रस्तुत भावपूर्ण ‘राम स्तुति’ ने सभी उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
*तुलसी और अनुरागी के पदों के गायन से बंधी रसधार*
सांगीतिक सत्र में भक्ति और दर्शन का अद्भुत समन्वय देखने को मिला। संगीत गुरु राजेन्द्र पारीक ने तुलसीदास के अमर पदों का गायन किया। इसके पश्चात प्रसिद्ध कथावाचक पं. अंकित शर्मा ने स्व. अनुरागी के कालजयी महाकाव्य ‘वंदनीय मानस के तुलसी’ से छंदों व पदों का अत्यंत ओजस्वी और मधुर गायन कर सभागार को रामभक्ति के रंग में सराबोर कर दिया। भजन गायक एवं भूपेन्द्र सिंह भदौरिया ने भी संगीतमय प्रस्तुतियों से तालियां बटोरीं।
*व्याख्यान सत्र: तुलसी का साहित्य कालजयी और समाज का मार्गदर्शक*
समारोह के वैचारिक सत्र में लोकमंगल के संरक्षक डॉ. भगवानस्वरूप चैतन्य ने प्रस्तावना रखते हुए तुलसी साहित्य के लोकमंगल स्वरूप को रेखांकित किया। मुख्य वक्ता डॉ. श्रद्धा सक्सेना ने कहा कि तुलसी का काव्य मानव चेतना और मर्यादा का शाश्वत दस्तावेज है। शिक्षाविद् कवयित्री डॉ. राजरानी शर्मा ने स्व. पं. रामप्रकाश अनुरागी के साहित्यिक अवदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। मुख्य अतिथि प्रधान मुख्य वन संरक्षक लवित भारती, वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. केशव पाण्डेय ने भी विचार रखे तथा साहित्य को समाज का दर्पण बताया।
*साहित्य और कला जगत की विभूतियों को ‘लोकमंगल साहित्य सम्मान’*
सम्मानित होने वाले प्रमुख नामों में सीताराम बघेल, डॉ. राजरानी शर्मा, पं. अंकित शर्मा, संगीत गुरु राजेन्द्र पारीक, इतिहासकार राजेन्द्र श्रीवास्तव, चित्रकार के.पी. श्रीवास्तव, श्रीमती सुनीति बैश, डॉ. पुष्पा सिसौदिया, अनुभूति दुबे, भजन गायक, वरिष्ठ पत्रकार सुरेश दंडोतिया, रविंद्र झारखरिया शामिल रहे।
कार्यक्रम के अंत में काव्य गोष्ठी का आयोजन हुआ जिसमें कवियों ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। संरक्षक डॉक्टर भगवान स्वरूप चैतन्य सभी का आभार व्यक्त किया। वरिष्ठ पत्रकार एवं संयोजक अजय दुबे तथा सह-समन्वयक प्रवीण कमठान, डॉ. लालजी, भूपेन्द्र सिंह भदौरिया एवं राजकुमार शर्मा ने आभार व्यक्त किया।
