सभी शाला भवन बेहतर और व्यवस्थत रहें, इसके लिये प्रयास, शिक्षा विभाग की बैठक में दिए निर्देश

ग्वालियर। जिले के शासकीय शाला भवन बेहतर हों और वहाँ अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को सभी मूलभूत सुविधायें उपलब्ध हों। इसके लिये जिले के शासकीय शाला भवनों की मरम्मत का कार्य करने के साथ-साथ जीर्ण-शीर्ण शाला भवनों के स्थान पर नए भवन निर्माण की स्वीकृति भी प्रदान की गई है। कलेक्टर रुचिका चौहान ने गुरुवार को जिले के शाला भवनों की मरम्मत, नवीन निर्माण और शाला भवनों की व्यवस्थाओं के संबंध में शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ विस्तार से समीक्षा की और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

कलेक्ट्रेट कार्यालय के सभाकक्ष में आयोजित शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में जीर्ण-शीर्ण शाला भवनों के स्थान पर नवीन भवनों के निर्माण, क्षतिग्रस्त शाला भवनों की मरम्मत के साथ-साथ छात्र-छात्राओं के लिये शौचालय, शाला भवनों में विद्युत और पेयजल व्यवस्था के साथ-साथ शाला भवनों की साफ-सफाई के संबंध में विस्तार से समीक्षा की गई। बैठक में बताया गया कि जिले में 39 शाला भवनों में मरम्मत का कार्य किया जा रहा है। इसके साथ ही जीर्ण-शीर्ण 32 भवनों के स्थान पर नवीन शाला भवनों की स्वीकृति प्राप्त हो गई है।

कलेक्टर रुचिका चौहान ने निर्देश दिए हैं कि जिले में सभी शाला भवनों को बेहतर बनाने की दिशा में कार्रवाई की जाए। शाला भवनों में छात्र-छात्राओं के लिये शौचालय, पेयजल व्यवस्था और विद्युत व्यवस्था को भी चाक-चौबंद बनाया जाए। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया है कि जिले में भ्रमण कर जिन शाला भवनों में मरम्मत की आवश्यकता है, उनमें मरम्मत और जीर्ण-शीर्ण शाला भवनों के स्थान पर नवीन भवन निर्माण की आवश्यकता हो तो उसके प्रस्ताव तैयार करें।

जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सोजान सिंह रावत ने कहा कि पंचायत के माध्यम से जिले के सभी शाला भवनों में साफ-सफाई का विशेष अभियान जिले में संचालित किया जा रहा है। शिक्षा विभाग के अधिकारी और शिक्षक भी पंचायत के साथ समन्वय और सहयोग बनाकर शाला भवनों के साफ-सफाई कार्य को प्राथमिकता से करें और आगे भी शाला भवन साफ-सुथरे बने रहें, इसके सार्थक प्रयास किए जाएं।

*शिक्षक और स्टाफ के निजी स्वत्वों का भी समय पर हो भुगतान*

कलेक्टर रुचिका चौहान ने यह भी निर्देश दिए हैं कि शिक्षा विभाग के सभी शिक्षक और स्टाफ के निजी स्वत्वों का भुगतान एवं उनके प्रकरणों का निराकरण प्राथमिकता के साथ किया जाना चाहिए। सेवानिवृत्त होने के पश्चात भी किसी शिक्षक या स्टाफ का कोई क्लेम लापरवाही के कारण लंबित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने सभी विकासखंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया है कि आगामी तीन सप्ताह में अपने-अपने क्षेत्र के प्रकरणों की समीक्षा करें और प्राथमिकता से उनका निराकरण सुनिश्चित करें। निर्धारित अवधि के पश्चात भी अगर किसी का कोई व्यक्तिगत क्लेम लापरवाही के कारण लंबित पाया गया तो संबंधित के विरूद्ध दण्डात्मक कार्रवाई की जायेगी।

Next Post

गड्ढों और कीचड़ से ग्रामीणों का आवागमन हुआ मुश्किल

Wed Aug 19 , 2026
सिंगरौली । जनपद पंचायत बैढ़न के खुटार क्षेत्र के डिवाटोला में सड़क की बदहाली ने विकास कार्यों की जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। करीब दो वर्ष पहले बनी सड़क ग्रामीणों के आवागमन का प्रमुख माध्यम थी, लेकिन 6 मई 2025 को नल-जल योजना की पाइपलाइन बिछाने […]

You May Like