राजनीतिक चुनौतियों के लिये कांग्रेस मजबूत कर रही संगठनात्मक ढ़ांचा

विंध्य की डायरी

डा. रवि तिवारी

विंध्य में कांग्रेस के संगठनात्मक ढ़ांचे को मजबूती के साथ खड़ा किया जा रहा है. क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिये संगठन सृजन अभियान और बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण पर जोर पार्टी दे रही है. खासकर रीवा में बूथ, ब्लाक, मंडल और जिला स्तर के पदाधिकारियों की सक्रियता और सत्यापन का काम तेजी से चल रहा है. मौजूदा जिलाध्यक्ष इंजी. राजेन्द्र शर्मा अहम भूमिका निभा रहे है. ब्लाक स्तर से लेकर बूथ स्तर तक संगठन को खड़ा करने के साथ कमेटियों का गठन किया गया है. निश्चित तौर पर जिलाध्यक्ष की लगन और पार्टी के प्रति उनकी निष्ठा का ही परिणाम है कि रीवा में आज कांग्रेस का संगठन भाजपा की तरह मजबूती के साथ खड़ा हो गया है. आगामी आने वाले चुनाव को देखते हुए कांग्रेस पूरा फोकस संगठन पर कर रही है. विंध्य के अन्य जिलों में संगठन की स्थित उतनी मजबूत नही है जितनी रीवा में हुई है.

यहां भव्य जिला कांग्रेस कार्यालय भवन का शिलान्यास भी हो चुका है. जिससे संगठनात्मक गतिविधियों को स्थाई केन्द्र मिल जाएगा. विंध्य कभी कांग्रेस का गढ़ था लेकिन पिछले कई वर्षो से वनवास की स्थित बनी हुई है. जिस प्रकार से संगठन को लेकर तैयारी चल रही है उससे लग रहा है कि कांग्रेस ने भाजपा से निपटने के लिये रणनीति के तहत अपनी राजनीतिक तैयारी अभी से शुरू कर दी है. रीवा में अध्यक्ष इंजी. राजेन्द्र शर्मा ने पार्टी को नए तरीके से खड़ा करने के साथ नई ऊर्जा प्रदान की है. उनके द्वारा पूरा फोकस संगठन को नीचे तक मजबूत करने की पहल शुरू की गई है. परिणाम स्वरूप आज नीचे के पायदान तक संगठन नजर आ रहा है. आगामी राजनीतिक चुनौतियों और चुनावों को देखते हुए कांग्रेस रीवा सहित पूरे विंध्य में कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने में जुटी है.

नाराज भाजपा विधायक धरने पर

स्वतंत्रता दिवस के एक दिन पूर्व रीवा के जवा मुख्यालय में तिरंगा यात्रा निकालने पहुंचे सिरमौर से भाजपा विधायक दिव्यराज सिंह प्रशासनिक नाकामी से नाराज होकर धरने पर बैठ गये. स्थानीय समस्याओं को लेकर विधायक ने अधिकारियों से फोन पर बात की और जब सकरात्मक जवाब नही आया तो वह सीएफटी भवन पहुंचे और धरने में बैठ गये. समर्थकों के साथ कलेक्टर को मौके में बुलाने पर अड़ गये. विधायक के धरने पर बैठते ही जिला पंचायत के सीईओ भी मैराथन दौड़ लगाते हुए मौके पर पहुंचे, तमाम आश्वासन दिये फिर भी विधायक जी का गुस्सा कम नही हुआ और देर रात कलेक्टर नरेन्द्र सूर्यवंशी जब पहुंचे और आश्वासन दिया तब जाकर मामला शांत हुआ. अब सवाल यह उठता है कि माननीय विधायक को अधिकारी हल्के से लेते है क्या? या उनकी सुनी नही जाती. परिणाम स्वरूप सत्ताधारी दल का विधायक होने के बाद भी अपनी बात रखने के लिये धरने का सहारा लेना पड़ा. आखिर प्रशासन विधायक द्वारा उठाई गई समस्या को गंभीरता से क्यों नही लेते, यह भी एक बड़ा सवाल है. ऐसे में आम आदमी की भला कहां सुनवाई होगी.

मिठाई के लिये भिड़ गये दो प्रोफेसर

स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय में ध्वजारोहण के पश्चात मिष्ठान वितरण का कार्यक्रम हुआ. जहां कई वरिष्ठ प्रोफेसर पहुंचे. सब कुछ सकरात्मक और अच्छा चल रहा था इसी बीच दो वरिष्ठ प्रोफेसर मिष्ठान को लेकर तूत-मैं पर आ गये और इसके बाद बात इस कदर बढ़ी की दोनो ने आपा खो दिया और सभी के सामने एक-दूसरे को मारने के लिये कुर्सी तक उठा ली. शायद दोनो अपने पद की गरिमा और गुरू की मर्यादा को भूल चुके थे. यह नाराजा देख आसपास खड़े प्रोफेसर बीच-बचाव करने पहुंचे और मामले को किसी तरह शांत कराया

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