
इंदौर. जिस सौतेले पिता पर भरोसा कर परिवार ने घर की जिम्मेदारी सौंपी थी, उसी ने 16 साल से कम उम्र की सौतेली बेटी को घर में अकेला पाकर उसके साथ दुष्कृत्य किया. मामले में पंचम अपर सत्र न्यायाधीश एवं विशेष न्यायालय ने आरोपी को पॉक्सो अधिनियम की दो धाराओं में 20-20 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है. कोर्ट ने आरोपी के कृत्य को गंभीर मानते हुए कहा कि ऐसे व्यक्ति के प्रति किसी तरह की सहानुभूति नहीं दिखाई जा सकती.
सुनाए गए फैसले में अदालत ने बाणगंगा थाने के मामले में 29 वर्षीय आरोपी को पॉक्सो अधिनियम के तहत 20-20 साल के सश्रम कारावास के साथ एक अन्य मामले में तीन माह के सादा कारावास की सजा सुनाई. आरोपी पर 21 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया. घटना 25 मई 2024 की है. बालिका की मां नौकरी पर गई थी और वह अपने भाई-बहनों के साथ घर पर थी. इसी दौरान उसका सौतेला पिता घर पहुंचा. आरोपी ने बेडरूम के दोनों दरवाजे बंद कर मोबाइल पर तेज आवाज में गाने चला दिए. इसके बाद बालिका को हॉल में ले जाकर उसके साथ दुष्कृत्य किया. बालिका रोने लगी और किसी तरह आरोपी से छूटकर बाथरूम में चली गई. इसके बाद वह नहाकर पड़ोस में रहने वाली महिला के घर पहुंची और अपनी मां से बात कराने के लिए कहा. मां का फोन नहीं उठने पर पड़ोसन ने उससे रोने की वजह पूछी तो उसने पूरी घटना बता दी. बाद में मां का फोन आने पर पड़ोसन ने उसे घटना की जानकारी दी. बालिका ने पुलिस को यह भी बताया था कि आरोपी पहले भी उसके साथ छेड़छाड़ कर चुका था. वह मां को छोड़कर चले जाने की धमकी देता था. परिवार में मां ही उसका और भाई-बहनों का सहारा थी, इसलिए उसने पहले डर के कारण मां को यह बात नहीं बताई थी. शिकायत के बाद बाणगंगा पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जांच शुरू की. बालिका के बयान दर्ज करने के साथ उसका मेडिकल परीक्षण कराया और अन्य गवाहों के बयान लिए. जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने चालान कोर्ट में पेश किया था. सुनवाई के दौरान अभियोजन ने 10 गवाहों के बयान कराए. साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने आरोपी को दोषी मानते हुए सजा सुनाई.
अदालत ने बालिका को हुई मानसिक क्षति को ध्यान में रखते हुए पीड़ित प्रतिकर योजना के तहत चार लाख रुपए की सहायता राशि दिए जाने की अनुशंसा भी की है. फैसले में कोर्ट ने कहा कि सौतेला पिता होते हुए ऐसा दुष्साहस करने वाले आरोपी के प्रति किसी भी प्रकार की सहानुभूति नहीं दिखाई जा सकती. बच्चों के प्रति बढ़ते अपराध, उनकी असुरक्षा और ऐसे अपराधों का उनके वर्तमान एवं भविष्य पर पड़ने वाले प्रभाव को देखते हुए आरोपी को शिक्षाप्रद दंड देना आवश्यक है. मामले में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक सीमा शर्मा ने पैरवी की. प्रकरण की जानकारी उपनिदेशक अभियोजन राजेंद्र सिंह भदौरिया ने दी.
