पंचकूला, 18 अगस्त (वार्ता) हरियाणा में अक्षय ऊर्जा के विस्तार में सौर ऊर्जा सबसे बड़े स्रोत के रूप में उभरी है। प्रदेश की कुल स्थापित अक्षय ऊर्जा क्षमता 30 जून, 2026 तक बढ़कर 3,206.56 मेगावाट हो गई है। इसमें अकेले सौर ऊर्जा की क्षमता 2,802.18 मेगावाट है। इसके अलावा जैव ऊर्जा की स्थापित क्षमता 330.88 मेगावाट और लघु जल विद्युत परियोजनाओं की क्षमता 73.50 मेगावाट तक पहुंच गई है।
नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश की कुल अक्षय ऊर्जा क्षमता में अब सौर ऊर्जा की हिस्सेदारी 87 फीसदी से अधिक हो गई है। पिछले दो वर्षों में खेती से लेकर सरकारी भवनों, गोशालाओं और सामाजिक क्षेत्र के संस्थानों तक सौर ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ा है।
कृषि क्षेत्र में सबसे बड़ा विस्तार प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएम-कुसुम) के घटक-बी के तहत हुआ है। पिछले दो वर्षों में प्रदेश में 570.176 मेगावाट क्षमता के सौर पंप लगाए गए हैं।
सौर पंप लगाने में सिरसा 124.640 मेगावाट के साथ प्रदेश में पहले स्थान पर है। इसके बाद हिसार में 111.520 मेगावाट, जींद में 66.209 मेगावाट, फतेहाबाद में 49.137 मेगावाट और भिवानी में 47.995 मेगावाट क्षमता के सौर पंप लगाए गए। इन पांच जिलों की हिस्सेदारी ही करीब 400 मेगावाट तक पहुंच गई है।
हरियाणा में पिछले दो वर्षों के दौरान नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग के पास 464.341 मेगावाट क्षमता की बड़ी सौर परियोजनाएं पंजीकृत हुई हैं। यह क्षमता प्रदेश में पहले से स्थापित 3,206.56 मेगावाट अक्षय ऊर्जा क्षमता के अतिरिक्त पंजीकृत परियोजनाओं की है।
इन परियोजनाओं में भी सिरसा सबसे आगे है। जिले में 183.98 मेगावाट क्षमता की सौर परियोजनाएं पंजीकृत हुई हैं। भिवानी 177.4 मेगावाट के साथ दूसरे स्थान पर है। हिसार में 36.3 मेगावाट और महेंद्रगढ़ में 24.456 मेगावाट क्षमता की परियोजनाएं पंजीकृत हुई हैं।
सरकारी भवनों, गोशालाओं और सामाजिक क्षेत्र के संस्थानों की छतों पर भी सौर संयंत्र लगाए जा रहे हैं। इन श्रेणियों में प्रदेश में कुल 4,124.5 किलोवाट क्षमता के रूफटॉप सौर संयंत्र लगाए गए हैं।
इस मामले में जींद 628.5 किलोवाट के साथ पहले स्थान पर है। पंचकूला में 579 किलोवाट, रोहतक में 366 किलोवाट और हिसार में 345.5 किलोवाट क्षमता के रूफटॉप सौर संयंत्र लगाए गए हैं।
सौर ऊर्जा आधारित स्ट्रीट लाइटों की कुल क्षमता भी 1,133 किलोवाट तक पहुंच गई है। इसमें भिवानी 340 किलोवाट के साथ सबसे आगे है। रेवाड़ी में 213 किलोवाट, यमुनानगर में 106 किलोवाट और पंचकूला में 89 किलोवाट क्षमता दर्ज की गई है।
कृषि प्रधान हरियाणा में जैव ऊर्जा के क्षेत्र में भी विस्तार हुआ है। प्रदेश में तीन नई बायोमास परियोजनाओं के माध्यम से 34 मेगावाट क्षमता जोड़ी गई है।
इनमें जींद बायो एनर्जी और फतेहाबाद बायो एनर्जी की 9.9-9.9 मेगावाट क्षमता की परियोजनाएं धान की पराली का इस्तेमाल करती हैं। करनाल में हरियाणा लिकर्स प्राइवेट लिमिटेड की परियोजना की क्षमता 14.2 मेगावाट है।
प्रदेश में अक्षय ऊर्जा क्षेत्र के विस्तार को रोजगार से भी जोड़ा जा रहा है। काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वाटर के अध्ययन के हवाले से उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक जून 2026 तक हरियाणा में इस क्षेत्र से करीब 1.28 लाख रोजगार सृजित होने का अनुमान है।
हरियाणा पीएम-कुसुम सहित केंद्र की विभिन्न राष्ट्रीय अक्षय ऊर्जा योजनाओं के दायरे में है। पीएम-कुसुम के लिए केंद्रीय वित्तीय सहायता का प्रावधान 34,422 करोड़ रुपये है। सौर पार्क और अल्ट्रा मेगा सौर ऊर्जा परियोजनाओं के विकास की योजना के लिए 8,100 करोड़ रुपये का प्रावधान है।
राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के तहत देश में वर्ष 2030 तक सालाना कम से कम 50 लाख मीट्रिक टन हरित हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता विकसित करने का लक्ष्य है। इसके लिए 19,744 करोड़ रुपये की केंद्रीय वित्तीय सहायता का प्रावधान है।
अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं की सांकेतिक औसत पूंजीगत लागत सौर ऊर्जा के लिए करीब चार करोड़ रुपये प्रति मेगावाट, जैव ऊर्जा के लिए छह से आठ करोड़ रुपये और लघु जल विद्युत परियोजनाओं के लिए करीब दस करोड़ रुपये प्रति मेगावाट बताई गई है। वास्तविक लागत तकनीक, स्थान, परियोजना के आकार और संसाधनों की उपलब्धता के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
आंकड़े बताते हैं कि हरियाणा में अक्षय ऊर्जा का विस्तार अब केवल बड़ी बिजली परियोजनाओं तक सीमित नहीं है। खेतों में सौर पंप, सरकारी और सामाजिक संस्थानों की छतों पर सौर संयंत्र, सौर स्ट्रीट लाइट और पराली आधारित बिजली परियोजनाएं प्रदेश के अक्षय ऊर्जा ढांचे का हिस्सा बनती जा रही हैं।
