इंदौर: स्वर्गीय अजीत कुमार जैन के निधन के बाद परिवार ने दुख की घड़ी में मानवीय मिसाल पेश करते हुए उनके नेत्र, त्वचा और संपूर्ण देहदान का निर्णय लिया. परिवार के इस फैसले से जरूरतमंदों को उपचार में मदद मिलने के साथ चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान को भी महत्वपूर्ण सहयोग मिलेगा.
तीसरे के उठावने के अवसर पर समाज के पदाधिकारियों और परिचितों ने शोकाकुल परिवार से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की और इस निर्णय की सराहना की. उपस्थित लोगों ने कहा कि नेत्रदान से किसी जरूरतमंद के जीवन में रोशनी लौट सकती है, त्वचा दान गंभीर रूप से जले मरीजों के उपचार में उपयोगी है, जबकि देहदान चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान के लिए महत्वपूर्ण योगदान है. परिवार के इस निर्णय को मानव सेवा, त्याग और परोपकार की भावना से प्रेरित बताते हुए समाजजनों ने दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित की.
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