भोपाल। 1942 में नागपुर में जन्में श्री प्रफुल्ल कुमार माहेश्वरी का नाम मप्र की पत्रकारिता में केवल एक समाचार-पत्र संचालक के रूप में नहीं, बल्कि सामाजिक सरोकार वाले व्यक्तित्व के रूप में जाना जाता है। नवभारत के संस्थापक बाबू जी श्री रामगोपाल माहेश्वरी ने उन्हें मध्य भारत प्रांत और बाद में अविभाजित मध्यप्रदेश में समाचार-पत्र के विस्तार की जिम्मेदारी सौंपी। उन्होंने इस दायित्व को चुनौती की तरह स्वीकार किया और नवभारत को प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यही विस्तार आगे चलकर नवभारत की मप्र में मजबूत पहचान का आधार बना।
नवभारत का विस्तार केवल हिन्दी पत्रकारिता के भौगोलिक प्रसार तक सीमित नहीं रहा। वर्ष 1957 में भोपाल से अंग्रेजी दैनिक मध्यप्रदेश क्रॉनिकल का प्रकाशन शुरू हुआ। बाद में 1984 में इसका प्रकाशन रायपुर से भी होने लगा। इस तरह समूह ने हिन्दी के साथ अंग्रेजी पत्रकारिता में भी अपनी उपस्थिति मजबूत की।
वर्ष 1984 में बिलासपुर संस्करण शुरू हुआ। इसके साथ नवभारत छह संस्करणों वाला सशक्त दैनिक बन गया नागपुर, जबलपुर, भोपाल, रायपुर, इंदौर और बिलासपुर। उस समय तक यह नेटवर्क तत्कालीन मध्यप्रदेश और आसपास के बड़े भूभाग को जोड़ चुका था।
इसके बाद विस्तार का अगला चरण मध्यप्रदेश के उत्तर और विंध्य क्षेत्र की ओर आया। वर्ष 1995 में ग्वालियर संस्करण शुरू हुआ। ग्वालियर ने मध्यप्रदेश के उत्तरी हिस्से को नवभारत के पाठक परिवार से जोड़ा। यहां इतिहास, राजनीति और बदलते सामाजिक जीवन की आवाज को जगह मिली।
वर्ष 1999 में सतना संस्करण शुरू हुआ। इसके साथ विंध्य क्षेत्र भी नवभारत के मजबूत नेटवर्क का हिस्सा बना। सतना के माध्यम से विंध्य के सामाजिक, आर्थिक और स्थानीय सरोकारों को व्यापक मंच मिला।
फिर वर्ष 2000 में छिंदवाड़ा संस्करण शुरू हुआ। यह मध्यप्रदेश में नवभारत के विस्तार का एक महत्वपूर्ण पड़ाव था और इसके साथ 10 संस्करणों का नेटवर्क पूरा हुआ।
नागपुर से जबलपुर, भोपाल और इंदौर तक पहुंची यात्रा अब ग्वालियर, सतना और छिंदवाड़ा तक फैल चुकी थी। यह केवल संस्करणों की संख्या बढ़ने की कहानी नहीं थी। यह उस पत्रकारिता की यात्रा थी, जो प्रदेश के अलग-अलग भूगोल, समाज और समुदायों की अपनी-अपनी आवाज को एक साझा मंच दे रही थी।
ग्वालियर से उत्तर की आवाज आई, सतना से विंध्य की और छिंदवाड़ा से आदिवासी, ग्रामीण तथा उभरते मध्यप्रदेश की आवाज नवभारत के पन्नों तक पहुंची। इस तरह अखबार का विस्तार प्रदेश के नक्शे पर नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में दिखाई देने लगा।
पत्रकारिता के साथ उनका सार्वजनिक जीवन भी व्यापक रहा। वे राज्यसभा के मनोनीत सदस्य बने और विभिन्न संसदीय समितियों में सक्रिय रहे। यूनाइटेड न्यूज ऑफ इंडिया के निदेशक मंडल के चेयरमैन सहित कई संस्थागत जिम्मेदारियां उन्होंने संभालीं। वे मध्यप्रदेश दैनिक समाचार पत्र संघ के संस्थापक अध्यक्ष, मध्यप्रदेश उद्योग एवं वाणिज्य महासंघ से जुड़े पदों पर भी रहे।
सामाजिक क्षेत्र में भी उनकी सक्रियता उल्लेखनीय थी। उन्होंने सांसद निधि से आम लोगों और पत्रकारों के लिए कई काम किये वे रोटरी क्लब में विभिन्न पदों पर रहे, जो उनके संगठनात्मक और सामाजिक नेतृत्व का परिचायक है। इस तरह श्री प्रफुल्ल कुमार माहेश्वरी की यात्रा पत्रकारिता से शुरू होकर समाचार-पत्र के विस्तार, संसद, उद्योग-जगत और सामाजिक संस्थाओं तक पहुंची। 15 नवंबर 2018 को उनके निधन के साथ एक ऐसा अध्याय समाप्त हुआ, जिसने मध्यप्रदेश की पत्रकारिता को व्यापक भौगोलिक और सामाजिक आधार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके निधन के उपरान्त अगली पीढ़ी उनके कार्यों को आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभा रही है।
