जबलपुर: हाईकोर्ट जस्टिस विवेक रूसिया तथा जस्टिस प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने दायर जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए धान घोटाले की प्रदेश स्तरीय जांच के आदेश जारी किये है। युगलपीठ ने प्रदेश में हुए धान घोटाले के संबंध में नागरिक आपूर्ति निगम को शपथ-पत्र के साथ जवाब पेष करने के निर्देश जारी किये है। युगलपीठ ने ईओडब्ल्यू को धान घोटाले की जांच की स्टेटस रिपोर्ट पेष करने निर्देश जारी किये है। याचिका पर अगली सुनवाई 29 सितम्बर को निर्धारित की गयी है।
नागरिक उपभोक्ता मंच की तरफ से दायर की गयी याचिका में कहा गया था कि जबलपुर कलेक्टर दीपक सक्सेका ने आदेष पर की गयी प्रषासनिक जांच में जबलपुर जिले में ही 34 करोड रूपये का धान घोटाला प्रकाष में आया था। जांच में पाया गया था कि धान उपार्जन और परिवहन के नाम पर बड़े पैमाने पर घोटाला किया गया। जांच के दौरान पाया गया कि 100 से 200 क्विंटल तक धान का परिवाहन दोपहिया और तिपहिया वाहनों से किया गया। कई ऐसे स्कूटर, ऑटो और यात्री बसों के पंजीयन नंबर दर्ज मिले, जिनसे भारी मात्रा में अनाज का परिवाहन तकनीकी रूप से संभव ही नहीं है। इस फर्जीवाड़े की पुष्टि के बाद जबलपुर जिले में 90 व्यक्तियों और ट्रांसपोर्टरों के खिलाफ अलग-अलग एफआईआर दर्ज कराई गईं थी।
याचिकाकर्ता की तरफ से पैरवी करते हुए अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने युगलपीठ को बताया कि धान घोटाले के तार प्रदेश के अन्य जिलों से जुड़े हुए है। मंडला,डिंडोरी,सिवनी बालाघाट में कुछ प्रकरण दर्ज हुए है। प्रदेष सरकार ने 27 जिला कलेक्टरों को धान घोटाले की जांच करने के संबंध में आदेश जारी किये थे। जिससे स्पस्ष्ट है कि यह प्रदेष स्तरीय घोटाला है।ष्याचिका की सुनवाई करते हुए युगलपीठ ने जबलपुर के तत्कालीन जबलपुर कलेक्टर दीपक सक्सेना की सरहाना करते हुए कहा कि तत्परता और सक्रियता के कारण ही करोड़ों का घोटला उजागर हुआ। इसी प्रकार की सजगता अन्य जिलों के प्रशासनिक अधिकारियों को भी दिखानी चाहिए थी। प्रदेश सरकार ने 27 जिला कलेक्टरों को जांच के निर्देश के बावजूद जमीनी स्तर पर ठोस परिणाम नहीं आए। युगलपीठ ने नागरिक आपूर्ति निगम को निर्देशित किया है कि जबलपुर की कार्रवाई के बाद उसने प्रदेश स्तर में की गयी जांच के संबंध में शपथ-पत्र के साथ जानकारी पेष करें। युगलपीठ ने ईओडब्ल्यू के निर्देशित किया है कि धान घोटाले के संबंध में दर्ज किये गये प्रकरण की स्टेटस रिपोर्ट पेष करें
