पॉकेट गवाह ने खोली पुलिस की केस डायरी, चार टीआई पर कार्रवाई

इंदौर:अपराध दर्ज करने और जांच की प्रक्रिया में एक ही लोगों को बार-बार गवाह बनाने का मामला अब इंदौर पुलिस के चार थाना प्रभारियों पर कार्रवाई तक पहुंच गया है. खजराना और चंदन नगर के मामलों में चुनिंदा गवाहों के लगातार इस्तेमाल पर सवाल उठ रहे थे, मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और विभागीय जांच के बाद तीन टीआई को एसआई पद पर डिमोट कर दिया, जबकि एक को थाना प्रभारी के पद से हटा दिया.

मामले में सबसे ताजा कार्रवाई खजराना के तत्कालीन टीआई दिनेश वर्मा के खिलाफ हुई है. विभागीय जांच में उनके कार्यकाल के दौरान जुआ, सट्टा और आर्म्स एक्ट सहित अन्य मामलों में दो गवाहों के लगातार इस्तेमाल की बात सामने आई. उपलब्ध रिकॉर्ड के मुताबिक, इरशाद को 742 और नवीन चौहान को 504 मामलों में गवाह बनाया था. पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह ने जांच में आरोप सिद्ध होने के बाद वर्मा को तीन साल के लिए टीआई से एसआई पद पर पदावनत किया है.

चंदन नगर से उठा सवाल, सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला
चंदन नगर थाने के करीब 1350 मामलों में अमीन रंगरेज, सलमान, अब्दुल और माजिद नाम के गवाहों के बार-बार इस्तेमाल का मामला भी जांच के घेरे में आया. इसी प्रकरण ने पुलिस की गवाह बनाने की प्रक्रिया पर न्यायिक स्तर पर सवाल खड़े किए. सुप्रीम कोर्ट में मामला पहुंचने के बाद पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को भी जवाब देना पड़ा. चंदन नगर के तत्कालीन टीआई इंद्रमणि पटेल को थाना प्रभारी के पद से हटा दिया है. उनके खिलाफ विभागीय जांच जारी है, हाल में हुए डीएसपी प्रमोशन में भी उनका नाम रोक दिया.

एमआईजी में शिकायतकर्ता को ही आरोपी बना दिया, टीआई डिमोट
एमआईजी थाने के तत्कालीन टीआई अजय वर्मा के खिलाफ वर्ष 2022 के मामले में कार्रवाई हुई. व्यापारी के खिलाफ शिकायत लेकर पहुंची युवती की समय पर एफआईआर दर्ज नहीं करने और बाद में उसी युवती के खिलाफ प्रकरण दर्ज किए जाने पर कोर्ट की रिपोर्ट के आधार पर विभागीय कार्रवाई हुई. अजय वर्मा को टीआई से एसआई और मामले के जांच अधिकारी धीरज शर्मा को एएसआई से आरक्षक पद पर पदावनत किया. वर्मा की पदावनति का मामला हाईकोर्ट में लंबित है.

नाबालिगों पर सट्टे का केस, विजयनगर टीआई भी डिमोट
वर्ष 2024 में विजयनगर थाने में नाबालिगों को सट्टे के फर्जी मामले में फंसाने के आरोपों की जांच के बाद तत्कालीन टीआई रवींद्र गुर्जर पर भी कार्रवाई हुई. उन्हें टीआई से एसआई बना दिया गया. कार्रवाई के बाद से गुर्जर ने करीब डेढ़ साल से ड्यूटी ज्वाइन नहीं की है. सिंगल बेंच से राहत नहीं मिलने के बाद मामला हाईकोर्ट की डबल बेंच में है.

पटेल से जुड़े दो मामले भी चर्चा में
चंदन नगर के तत्कालीन टीआई इंद्रमणि पटेल से जुड़े दो अन्य मामलों ने भी उनकी कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े किए. एक मामले में आरोपी अनवर हुसैन के आपराधिक रिकॉर्ड से जुड़े प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट में कथित गलत हलफनामा देने का आरोप लगा था. इस मामले में पुलिस अधिकारी दिशेष अग्रवाल को भी कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना पड़ा. दूसरे मामले में रेप के आरोपी के बेटे को 30 घंटे से अधिक समय तक थाने में बैठाए रखने के आरोप को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर हुई. एडवोकेट नीरज सोनी ने कार्रवाई को द्वेषपूर्ण बताया था. दो सुनवाइयों के बाद मंगलवार को याचिका वापस ले ली गई.

क्या पुराने केसों की भी होगी समीक्षा?
पॉकेट गवाहों का मामला सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल पुराने प्रकरणों की जांच प्रक्रिया को लेकर है. एक ही गवाहों के लगातार इस्तेमाल की पुष्टि होने पर क्या ऐसे मामलों की भी समीक्षा होगी, यह फिलहाल स्पष्ट नहीं है. पुलिस कमिश्नरेट ने स्वतंत्र और विश्वसनीय गवाहों के इस्तेमाल पर जोर दिया है. निर्देश हैं कि स्वतंत्र गवाह उपलब्ध नहीं होने की स्थिति और उसका कारण केस डायरी में दर्ज किया जाए.

विभागीय कार्रवाई की जाती है…
प्राथमिक जांच के बाद विभागीय जांच कराई जाती है. विभागीय जांच में पुलिस रेगुलेशन और सिविल सेवा आचरण अधिनियम के तहत जो आरोप सिद्ध पाए जाते हैं, उनके आधार पर विभागीय कार्रवाई की जाती है.
– एडिशनल डीसीपी, राजेश दंडोतिया

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