पात्रता की तारीख से प्रदान करें तृतीय-चतुर्थ क्रमोन्नति: हाईकोर्ट

जबलपुर: मप्र हाईकोर्ट के जस्टिस विशाल धगट की एकलपीठ ने एक अहम आदेश में स्पष्ट किया है कि शिक्षकों को पात्रता की तारीख से तृतीय-चतुर्थ क्रमोन्नति का लाभ प्रदान किया जाए। यह प्रक्रिया 90 दिन के भीतर पूर्ण कर ली जाये। मामला याचिकाकर्ता को 40 साल की सेवा के बाद भी लाभ से वंचित किए जाने के रवैये को चुनौती से संबंधित था। कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि तृतीय व चतुर्थ क्रमोन्नति का वेतनमान नियुक्ति तिथि से सेवा की गणना के आधार पर 30 व 35 वर्ष पूर्ण होने पर दिया जाएगा न कि मध्य प्रदेश शासन के परिपत्र 23 मार्च 20026 व एक अप्रैल 2026 में वर्णित तिथि एक जुलाई 2023 से प्रभावशील माना जाएगा।

दरअसल 40 वर्ष की सेवा के बाद सेवानिवृत्त हुए छतरपुर के सहायक शिक्षक राजकुमार पटेरिया को चतुर्थ क्रमोन्नति का लाभ नहीं दिए जाने के मामले में हाईकोर्ट की शरण ली थी। उनकी ओर से अधिवक्ता मनोज चंसौरिया ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि याचिकाकर्ता 30 नवंबर 2022 को सेवानिवृत्त हुआ था। उसने 26 मार्च व एक अप्रैल 2026 के शासन आदेश की संबंधित शर्त को चुनौती दी है। याचिका में चतुर्थ क्रमोन्नति का लाभ पात्रता की तारीख से देने तथा वेतन निर्धारण एवं सेवानिवृत्ति लाभों में उसका प्रभाव देने की मांग की गई है।

अधिवक्ता चंसौरिया ने कोर्ट को बताया कि इसी तरह का मुद्दा कृष्ण वल्लभ मकवाना बनाम मप्र शासन मामले में 21 मार्चए 2025 को तय किया जा चुका है। उस मामले में हाईकोर्ट ने माना था कि 30 वर्ष की सेवा पूरी करने वाले कर्मचारी को तृतीय क्रमोन्नत वेतनमान का लाभ दिया जाना चाहिये, भले ही वह संबंधित परिपत्र जारी होने से पहले सेवानिवृत्त हो चुका हो। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद याचिका का निराकरण करते हुए राज्य के अधिकारियों को निर्देश दिया कि पटेरिया के मामले में चतुर्थ क्रमोन्नति के लिए उनकी पात्रता की तारीख से विचार किया जाये न कि 26 मार्च 2026 एक अप्रैल 2026 के परिपत्र में निर्धारित तारीख से।

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