44 साल के भारत-श्रीलंका टेस्ट राइवलरी के अनसुने किस्से और ऐसे रिकॉर्ड जो आपको हैरान कर देंगे

नयी दिल्ली, भारत और श्रीलंका के 44 साल लंबे टेस्ट इतिहास के कई ऐसे अनोखे किस्से और अटूट रिकॉर्ड्स हैं जो हर क्रिकेट प्रेमी को हैरान कर देंगे। देखें सभी अनसुने किस्से।

भारत और श्रीलंका के बीच टेस्ट क्रिकेट की कहानी सिर्फ दो पड़ोसी देशों के बीच मुकाबले की कहानी नहीं है। चार दशकों से ज्यादा समय में दोनों टीमों के बीच कई ऐसे मुकाबले हुए हैं, जिन्होंने क्रिकेट इतिहास में अपनी खास जगह बनाई।

कभी बल्लेबाजों ने घंटों तक क्रीज पर टिककर रिकॉर्ड बनाए, तो कभी स्पिन गेंदबाजों ने ऐसी गेंदबाजी की कि दुनिया देखती रह गई। इस राइवलरी में रिकॉर्ड भी हैं, रोमांच भी है और ऐसे किस्से भी हैं जिन पर पहली बार सुनने पर यकीन करना मुश्किल हो जाता है।

कब हुआ था पहला टेस्ट मुकाबला?
सितंबर 1982 में भारत और श्रीलंका के बीच पहली बार टेस्ट मुकाबला खेला गया था। उस समय ये सिर्फ एक टेस्ट मैच की शुरुआत थी, लेकिन धीरे-धीरे ये मुकाबला उपमहाद्वीप की सबसे दिलचस्प टेस्ट राइवलरी में बदल गया।

इस मैच के असली हीरो श्रीलंका के दिग्गज बल्लेबाज दिलीप मेंडिस थे। उन्होंने भारत के मजबूत गेंदबाजी आक्रमण के सामने पहली पारी में 105 रन और फिर दूसरी पारी में भी ठीक 105 रन ठोक दिए। वो टेस्ट इतिहास में भारत के खिलाफ और भारत की सरजमीं पर एक ही मैच में दो शतक लगाने वाले श्रीलंका के पहले बल्लेबाज बने।

3 दिन तक नहीं गंवाया एक भी विकेट
भारत और श्रीलंका के टेस्ट इतिहास का सबसे हैरान करने वाला अध्याय 1997 में कोलंबो में देखने को मिला। श्रीलंका ने अपनी पहली पारी में इतनी लंबी बल्लेबाजी की कि भारतीय गेंदबाजों को लगातार तीन दिन तक मैदान पर मेहनत करनी पड़ी।

साल 1997 के उस ऐतिहासिक और हैरान कर देने वाले कोलंबो टेस्ट में श्रीलंका ने अपनी पहली पारी में 6 विकेट के नुकसान पर रिकॉर्ड 952 डिक्लेअर्ड रन बनाए थे। ये टेस्ट क्रिकेट के पूरे इतिहास में किसी भी टीम द्वारा बनाया गया आज तक का सबसे बड़ा और सर्वोच्च स्कोर है, जो करीब तीन दशकों के बाद भी एक अटूट रिकॉर्ड बना हुआ है।

इस मैच ने एक और दिलचस्प रिकॉर्ड बनाया। भारतीय स्पिनर नीलेश कुलकर्णी ने टेस्ट क्रिकेट में अपनी पहली ही गेंद पर मारवन अटापट्टू को आउट कर दिया। ऐसा लग रहा था कि उन्होंने अपने टेस्ट करियर की शानदार शुरुआत कर दी है। लेकिन इसके बाद कहानी पूरी तरह बदल गई।

कुलकर्णी ने उसी पारी में 419 और गेंदें फेंकीं, लेकिन इसके बाद एक भी विकेट नहीं ले सके। उनकी पूरी पारी के गेंदबाजी आंकड़े 1/195 रहे।

मुरलीधरन का 800वां विकेट
अगर भारत-श्रीलंका टेस्ट राइवलरी की सबसे भावुक और ऐतिहासिक कहानियों की बात करें, तो 2010 का गॉल टेस्ट सबसे ऊपर रहेगा। ये मुथैया मुरलीधरन के टेस्ट करियर का आखिरी मुकाबला था।

मुरलीधरन उस समय टेस्ट क्रिकेट में 800 विकेट पूरे करने से सिर्फ आठ विकेट दूर थे। आखिरी टेस्ट में उन्होंने ये असंभव सा दिखने वाला लक्ष्य हासिल करने के लिए पूरी ताकत लगा दी।

मैच के आखिरी हिस्से में भारत की आखिरी जोड़ी क्रीज पर थी और मुकाबला ड्रॉ की तरफ बढ़ता दिखाई दे रहा था। तभी मुरलीधरन ने प्रज्ञान ओझा को आउट कर दिया और अपने टेस्ट करियर का 800वां विकेट पूरा किया।

ये पल इसलिए भी खास था क्योंकि मुरलीधरन ने अपने आखिरी टेस्ट की आखिरी पारी में ही 800 विकेट का आंकड़ा छुआ। इस तरह उन्होंने अपने टेस्ट करियर को ऐसे रिकॉर्ड के साथ खत्म किया, जो आज भी क्रिकेट इतिहास के सबसे बड़े व्यक्तिगत रिकॉर्ड्स में शामिल है।

भारत में श्रीलंका का इंतजार अब भी जारी
भारत और श्रीलंका के बीच टेस्ट क्रिकेट की एक और दिलचस्प कहानी श्रीलंका के भारतीय जमीन पर रिकॉर्ड से जुड़ी है। श्रीलंका ने भारत में अब तक 22 टेस्ट मैच खेले हैं, लेकिन श्रीलंका टीम ने अब तक भारतीय जमीन पर 1 भी टेस्ट जीता नहीं है।

दोनों देशों के बीच आपसी दूरी बहुत ज्यादा नहीं है, लेकिन टेस्ट क्रिकेट में भारत आकर श्रीलंका के लिए जीत हासिल करना हमेशा बड़ी चुनौती रहा है। यही वजह है कि इस राइवलरी का ये रिकॉर्ड सबसे अनोखे आंकड़ों में गिना जाता है।

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