वाशिंगटन, न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को पता चला था कि नाटो समिट के दौरान ईरान के पास राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की लोकेशन की सटीक जानकारी थी। सुरक्षा अधिकारियों को ट्रंप के विमान पर सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल से हमले का गंभीर खतरा महसूस हुआ था।
खतरनाक सुरक्षा चाल और डिकॉय प्लेन
इस भारी खतरे को देखते हुए सीक्रेट सर्विस ने एक जटिल सुरक्षा चाल चली। ट्रंप को चुपचाप एक कैटरिंग कंटेनर के जरिए मिलिट्री प्लेन में बिठाकर निकाला गया, जबकि उनके पुराने ‘एयर फोर्स वन’ को एक ‘डिकॉय’ (धोखा) के रूप में इस्तेमाल किया गया, जिसमें कई वरिष्ठ अधिकारी और पत्रकार सवार थे।
यात्रियों की सुरक्षा पर विवाद और ट्रंप की प्रतिक्रिया
डिकॉय प्लेन में मौजूद लोगों को खतरे की जानकारी न दिए जाने पर कुछ पूर्व अधिकारियों ने इसकी आलोचना की है। हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने सीक्रेट सर्विस के निर्देशों का पूरी तरह पालन किया था।

