नई दिल्ली, सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को शिवसेना (UBT) की उस याचिका पर सुनवाई हुई जिसमें चुनाव आयोग के उस फैसले को चुनौती दी गई है जिसमें एकनाथ सिंद्रे गुट को ‘असली शिवसेना’ माना गया था। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि उसे सबसे पहले यह देखना होगा कि क्या पार्टी में कोई वास्तविक विभाजन हुआ था।
प्राथमिक सदस्यों और संगठन के समर्थन पर चर्चा
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि विभाजन की शुरुआत भले ही विधायी दल से हुई हो, लेकिन इसके प्रभाव को संगठन और लाखों प्राथमिक सदस्यों की संख्या के दायरे से अलग नहीं किया जा सकता। वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने उद्धव ठाकरे गुट का पक्ष रखते हुए चुनाव आयोग की प्रक्रिया और पार्टी के संविधान के इस्तेमाल पर गंभीर सवाल उठाए।
मामले की अगली सुनवाई और कानूनी बहस
सुनवाई के दौरान बेंच ने कहा कि चुनाव आयोग को इस मामले में कानूनी पहलुओं के साथ-साथ जमीनी हकीकत और पार्टी के ढांचे को भी ध्यान में रखना होगा। इस महत्वपूर्ण राजनीतिक और कानूनी मामले की आगे की सुनवाई गुरुवार को भी जारी रहेगी।

