गांधीनगर, 01 अक्टूबर (वार्ता) भारतीय पैरा स्विमिंग टीम के मुख्य कोच डॉ. वीरेंद्र कुमार डब्बास का मानना है कि 18 से 24 अक्टूबर तक होने वाले आइची-नागोया 2026 एशियन पैरा गेम्स में उनकी टीम से कम से कम चार पदक जीतेगी।
गांधीनगर के साई एनसीआई में चल रहे तैयारी कैंप के दौरान साई मीडिया से बातचीत में डॉ. वीरेंद्र कुमार डब्बास ने पैरा-तैराक रोहित कुमार की खास तौर पर तारीफ करते हुए कहा, “रोहित कुमार, जो पहले मार्कोस कमांडो रह चुके हैं, ने केवल डेढ़ साल पहले ही तैराकी शुरू की थी और वे अभी एशिया में दूसरे नंबर पर हैं। हिमांशु नंडाल और रवि कार्तिक बुडिगिना के साथ-साथ वे भी हमारे सबसे होनहार खिलाड़ियों में से एक हैं। मुझे उम्मीद है कि यह टीम कॉन्टिनेंटल गेम्स में कम से कम चार मेडल जीतेगी।”
भारतीय पैरा-स्विमिंग दल के सदस्य 20 सितंबर से 13 अक्टूबर, 2026 तक यहां के तैयारी शिविर में हिस्सा ले रहे हैं। भारतीय पैरालंपिक समिति (पीसीआई) में पैरा तैराकी के अध्यक्ष डॉ. डबास ने कहा, “अभी हम टेपरिंग चरण में हैं, हम गति पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, तेज शुरुआत और तीक्ष्ण मोड़ों पर काम कर रहे हैं, कल हमने हमने अपने तैराकों के समय (टाइमिंग) पर ध्यान दिया है। (आइची-नागोया 2026 एशियन पैरा गेम्स) बहुत पास हैं, इसलिए हमें ट्रेनिंग के आखिरी चरण यानी ‘टेपरिंग फ़ेज़’ में होना चाहिए। स्विमिंग कोचिंग का एक खास तरीका होता है: पहले हम तकनीक सिखाते हैं और एथलीट के स्टैमिना पर काम करते हैं, फिर स्ट्रेंथ ट्रेनिंग होती है, और आखिर में हम स्पीड पर काम करते हैं। बिना तकनीक, स्टैमिना और स्ट्रेंथ के स्पीड नहीं आ सकती।”
उन्होंने बताया कि अगर भारत को एक प्रमुख खेल देश के तौर पर उभरना है, तो स्कूलों में खेलों को भी पढ़ाई-लिखाई के बराबर ही महत्व देना होगा। अभी सरकार यह पक्का करने का प्रयास कर रही है कि स्टूडेंट्स को हफ़्ते में दो गेम पीरियड मिलें, लेकिन हफ़्ते में दो पीरियड से क्या हासिल होगा। साथ ही, इन गेम पीरियड के दौरान क्या उन्हें सच में खेल सिखाए जाते हैं। फिजिकल एजुकेशन टीचर बस स्टूडेंट्स को फुटबॉल या वॉलीबॉल पकड़ा देते हैं और बस हो गया, उन्हें कुछ सिखाने की कोई परवाह नहीं होती; उन्हें जवाबदेह बनाना जरूरी है।
उन्होंने कहा, “मैं अस्सी के दशक के आखिर में स्पोर्ट्स ट्रेनिंग में मास्टर्स (पीएचडी. नहीं) करने के लिए पूर्वी जर्मनी में था। वहाँ स्कूलों में छात्रों को तब तक अगली कक्षा में नहीं भेजा जाता था जब तक वे जिम्नास्टिक्स और स्विमिंग टेस्ट पास न कर लें; वहाँ पढ़ाई-लिखाई के साथ-साथ खेलों को भी बराबर या उससे भी अधिक अहमियत दी जाती थी।”
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अगर छोटे बच्चों को खिलाड़ी बनाना है, तो प्राइमरी स्कूल के शिक्षकों को इसमें अहम भूमिका निभानी होगी। उन्होंने कहा, “प्राइमरी लेवल पर हर शिक्षक को खेलों की अच्छी जानकारी होनी चाहिए; अगर प्राइमरी शिक्षक खेलों में माहिर हों और उन्हें अलग-अलग खेलों के माप और नियमों की जानकारी हो, तो यह बहुत मददगार होगा। मैं लंबे समय से यहां आ रहा हूँ क्योंकि मैं टैलेंट आइडेंटिफिकेशन डेवलपमेंट कमिटी (टीआईडीसी) का सदस्य हूं। कोच मयंक दीवान और कोच रवि तेजा की देखरेख में यहाँ काफ़ी सुधार हुआ है। यह सुधार साफ़ दिखता है क्योंकि तैराक अब बहुत बेहतर टाइमिंग दे रहे हैं। सेंटर में अच्छी क्वालिटी का खाना और रहने की अच्छी सुविधाएँ हैं, साथ ही खिलाड़ियों को स्पोर्ट्स साइंस डिपार्टमेंट का सपोर्ट भी मिलता है। ”

