
जबलपुर। जेलों में बंद विचाराधीन कैदियों और दोषसिद्ध व्यक्तियों के पहचान-सत्यापन सहित आधार कार्ड, राशन कार्ड और अन्य जरूरी दस्तावेज तैयार कराने के लिए हर माह विशेष शिविर लगाए जायेंगे। जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनींद्र कुमार सिंह की युगलपीठ ने राज्य सरकार को प्रत्येक जिले में जिला कलेक्टर के माध्यम से जेलों और संबंधित संस्थानों में शिविर आयोजित कराने के निर्देश दिए हैं। प्रक्रिया 15 दिन के भीतर शुरू करने को कहा गया है। युगलपीठ ने मामले में स्पष्ट किया है कि किसी व्यक्ति के विचाराधीन बंदी या दोषी होने मात्र से वह अथवा उसका परिवार नागरिक कल्याणकारी योजनाओं के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता। प्रत्येक नागरिक के साथ गरिमा के साथ व्यवहार किया जाना चाहिए।
दरअसल उक्त निर्देश सिंगरौली निवासी प्रहलाद प्रसाद विश्वकर्मा की अपील पर सुनवाई के दौरान दिए गए। पाक्सो अधिनियम के मामले में दो मई 2025 को मिली आजीवन कारावास की सजा के खिलाफ प्रहलाद ने सजा निलंबित करने की मांग की थी। उसके बेटे का एम्स भोपाल में रक्त कैंसर का उपचार चल रहा है। बैंक खाता सक्रिय कराने के लिए जैविक पहचान और पहचान सत्यापन अद्यतन कराने की आवश्यकता बताते हुए भी राहत मांगी गई थी। अपीलकर्ता की ओर से अधिवक्ता अग्निवेश दुबे और शासन की ओर से शासकीय अधिवक्ता अरविंद सिंह ने पक्ष रखा। सुनवाई में सामने आया कि जेलों में बंद कई कैदियों के जैविक पहचान संबंधी विवरण उपलब्ध नहीं होने से उनके बैंक खाते संचालित नहीं हो पा रहे हैं। इसका असर उनके परिवारों पर भी पड़ रहा है और वे सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में परेशानी का सामना कर रहे हैं। हाईकोर्ट ने निर्देशित किया है कि प्रत्येक जिले के कलेक्टर जिला जेल, केंद्रीय जेल और उप-जेल में कम से कम महीने में एक बार शिविर लगाना सुनिश्चित करें। इनमें पहचान सत्यापन अद्यतन करने, आधार कार्ड और राशन कार्ड बनवाने, बैंक खातों से संबंधित आवश्यक प्रक्रिया पूरी कराने तथा अन्य जरूरी सरकारी दस्तावेज तैयार कराने की सुविधा उपलब्ध कराई जाए। अभियान में किशोर न्याय गृह, बाल सुधार गृह, बाल आश्रय गृहए रिमांड गृह और वरिष्ठ नागरिक गृह सहित अन्य संबंधित संस्थानों को भी शामिल किया गया है। कलेक्टरों को अभियान की प्रगति की रिपोर्ट मुख्य सचिव के माध्यम से प्रस्तुत करनी होगी। न्यायालय ने उक्त आदेश की प्रति राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण और मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति के सचिव को भी भेजने के निर्देश दिये हैं। न्यायालय ने कहा कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण उचित समझे तो इस आदेश को देशभर की जेलों में बंद कैदियों के हित में प्रसारित कर सकता है।
