
जबलपुर। हाईकोर्ट के द्वारा पत्नी की मौत के मामले में उसके परिजनों को जांच के लिए सक्षम प्राधिकरण के समक्ष नया अभ्यावेदन पेश करने की अनुमति दिए जाने के खिलाफ सैन्य अधिकारी ने रिव्यू याचिका दायर की थी। याचिका की सुनवाई के दौरान एकलपीठ ने पाया कि पूर्व में दायर की गयी याचिका में तथ्यों को छुपाया गया था। हाईकोर्ट जस्टिस हिमांशु जोशी ने सुनवाई के बाद पूर्व में पारित आदेश को निरस्त कर दिया।
मेजर ओम नागार्जुन की तरफ से दायर की गयी रिव्यू याचिका में कहा गया था कि स्थानांतरण होने के कारण वह अपनी पत्नी कविता के साथ 9 जुलाई 2025 को जबलपुर आकर ऑफिसर मेस में रूक थे। रात का भोजन करने के बाद उनकी पत्नी बाथरूम में गिरकर बेहोश हो गयी थी। उन्होने एक अन्य सैन्य अधिकारी के मदद से पत्नी को मिलिट्री हॉस्पिटल ले गये। तमाम प्रयासों के बाद 10 जुलाई 2025 को उनकी पत्नी का देहांत हो गया था।
पत्नी के पिता पी दक्षिणामूर्ति ने स्वतंत्र जांच एजेन्सी से जांच करवाने के मांग करते हुए जबलपुर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। उन्होंने सक्षम अधिकारी के समक्ष अभ्यावेदन पेश करने की स्वतंत्रता के साथ याचिका को वापस ले लिया था।
रिव्यू याचिका में कहा गया था कि उक्त याचिका तथ्यों को छुपाकर दायर की गयी है। प्रतिवादी की तरफ से बेटी की संदिग्ध मौत के संबंध में दी गयी शिकायत की जांच पुलिस अधीक्षक जबलपुर, सेना के सक्षम अधिकारियों (जिसमें राइफल्स रेजिमेंटल ट्रेनिंग सेंटर के कानूनी अधिकारी भी शामिल थे) और डिंडीगुल, तमिलनाडु के पुलिस अधिकारियों द्वारा की गयी थी। जांच में कोई संज्ञेय अपराध नहीं होना पाया गया और मौत का कारण जिसके परिणामस्वरूप कार्डियो-रेस्पिरेटरी फेलियर (दिल और सांस की गति रुकना) हुआ था।
याचिकाकर्ता के खिलाफ एफआईआर दर्ज किये जाने की मांग करते हुए प्रतिवादी की तरफ से जेएमएफसी कोर्ट जबलपुर में आवेदन दायर किया था। पुलिस व मेडिकल रिपोर्ट का अवलोकन कर जेएमएफसी ने प्रकरण को खारिज कर दिया था। जिसके खिलाफ प्रतिवादी ने सेशन कोर्ट में आवेदन दायर किया था। आवेदन के लंबित रहने के दौरान उन्होंने जबलपुर हाईकोर्ट में याचिका प्राप्त कर उक्त स्वतंत्रता प्राप्त कर ली। इसके पूर्व प्रतिवादी ने इन्हीं तथ्यों के आधार पर मद्रास हाईकोर्ट में भी याचिका दायर की थी। पूर्व में की गयी सक्षम प्राधिकरण तथा हाईकोर्ट मद्रास में याचिका दायर करने के तथ्य याचिका में छुपाये गये थे। एकलपीठ ने सुनवाई के बाद पूर्व में पारित आदेश को निरस्त कर दिया।
