पॉक्सो कानून को संपत्ति विवाद पर हथियार नहीं बनाया जा सकता: हाईकोर्ट

जबलपुर। हाईकोर्ट के जस्टिस हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने संपत्ति विवाद में पॉक्सो कानून के कथित दुरुपयोग को गंभीरता से लेते हुए 66 वर्षीय वृद्ध के खिलाफ दर्ज एफआईआर निरस्त कर दी। एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि पॉक्सो कानून को संपत्ति विवाद पर हथियार नहीं बनाया जा सकता।

दरअसल जबलपुर के गोरखपुर थाने में आवेदक के खिलाफ 12 अक्टूबर 2025 को प्रकरण दर्ज हुआ था। आरोप बहू और पोती की ओर से लगाए गए थे। आवेदक वृद्ध ने कोर्ट को बताया कि एफआईआर से चार दिन पहले आठ अक्टूबर को उन्होंने एसपी-कलेक्टर को शिकायत देकर आरोप लगाया था कि बेटा-बहू संपत्ति अपने नाम कराने का दबाव बना रहे हैं और झूठे केस में फंसाने की धमकी दे रहे हैं। उसी दिन बेटे को बेदखल करने की सार्वजनिक सूचना और एनसीआर दर्ज कराई। 10 अक्टूबर को बेटियों के नाम वसीयत व पावर आफ अटार्नी बनाई गई और 12 अक्टूबर को एफआईआर दर्ज हो गई। हाईकोर्ट ने स्टेट आफ हरियाणा बनाम भजनलाल की श्रेणी-सात लागू करते हुए संपत्ति विवाद, पूर्व शिकायत, धमकी, वसीयत से बेदखली, कथित घटना के बाद करीब 18 महीने की देरी और बेदखली के तुरंत बाद एफआईआर को महत्वपूर्ण माना। धारा 528 बीएनएसएस के तहत एफआईआर निरस्त करते हुए कोर्ट ने कहा कि पॉक्सो कानून को संपत्ति विवाद में हथियार नहीं बनाया जा सकता।

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