
सौसर, मोहगांव जलाशय निर्माण से प्रभावित किसानों के 12 वर्षों के अथक संघर्ष और आंदोलन को आखिरकार बड़ी सफलता मिली है। जबलपुर उच्च न्यायालय ने किसानों के हक में एक ऐतिहासिक निर्णय सुनाते हुए उन्हें ‘पुनर्वास एवं पुनर्विस्थापन नीति 2013 के तहत लाभ प्रदान करने का आदेश दिया है। इस फैसले से प्रभावित क्षेत्र के पीड़ित किसानों में खुशी की लहर दौड़ गई है।
किसान हितों की लड़ाई लड़ रहे सुदामा मानमोडे ने बताया कि उच्च न्यायालय द्वारा 13 जुलाई 2026 को दिए गए इस निर्णय से जलाशय प्रभावित लगभग 500 परिवारों के लिए न्याय का मार्ग प्रशस्त हुआ है।
*फैसले के प्रमुख बिंदु और किसानों को मिलने वाले लाभ -*
पुनर्वास एवं पुनर्विस्थापन नीति 2013 के अंतर्गत प्रत्येक प्रभावित परिवार को लगभग ₹7,35,000 की राशि प्राप्त होगी। इसी तरह जिन किसानों की परिसंपत्तियों का आकलन पूर्व में छोड़ दिया गया था, उनके प्रकरणों का समाधान एडीजी कोर्ट के माध्यम से किया जाएगा। श्री मानमोडे ने नवभारत से चर्चा में बताया कि किसानों के पास अपनी परिसंपत्तियों के पर्याप्त दस्तावेज एवं साक्ष्य मौजूद हैं, जिससे एडीजी कोर्ट से भी शत-प्रतिशत न्याय मिलने की पूरी उम्मीद है।
*तहसील कार्यालय पहुंचकर सौंपी आदेश की प्रति -*
फैसले के बाद सैकड़ों की संख्या में किसान सौंसर तहसील कार्यालय पहुंचे। वहां उन्होंने एसडीएम को उच्च न्यायालय के आदेश की प्रमाणित प्रति सौंपी। साथ ही, आगामी आवश्यक कार्यवाही के लिए कलेक्टर के नाम भी आवेदन प्रस्तुत किया जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि प्रभावित किसान पिछले 12 वर्षों से लगातार ज्ञापनों और आंदोलनों के जरिए शासन-प्रशासन के समक्ष अपनी मांगें रख रहे थे, लेकिन लंबे समय तक उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया। उच्च न्यायालय के इस निर्णय ने वर्षों से संघर्षरत किसानों को बड़ी राहत दी है।
