किसानों को परंपरागत खेती के साथ बागवानी बनी आय बढ़ाने का जरिया

सतना:जिले में खेती को लाभ का व्यवसाय के मामले में अबतक उद्यानिकी विभाग के माध्यम से किए गए प्रयास ऊँट के मुंह में जीरे से ज्यादा नहीं। आधिकारिक तौर पर मिली जानकारी के अनुसार अबतक जिले में सिर्फ 186 किसान ही उन योजनाओं का लाभ सके है जिनके हिसाब से खेती लाभ का व्यवसाय है।किसान अब पारंपरिक खेती के साथ बागवानी और अन्य लाभकारी फसलों की ओर भी कदम बढ़ा रहे हैं। सरकार की ओर से फल, सब्जी, फूल और मसाला फसलों की खेती को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाओं के तहत किसानों को अनुदान दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य किसानों की उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ उनकी आमदनी में वृद्धि करना है। किसान अपने खेत के एक हिस्से में फल, सब्जी, फूल और मसाला फसलों की खेती कर रहे हैं, जबकि शेष भूमि पर धान, गेहूं, दलहन और अन्य पारंपरिक फसलों का उत्पादन कर रहे हैं। इससे किसानों को एक ही फसल पर निर्भर रहने के बजाय आय के कई स्रोत मिल रहे हैं।

उद्यानिकी विभाग के वर्ष 2025-26 के आंकड़ों के अनुसार जिले में विभिन्न उद्यानिकी फसलों की खेती के लिए किसानों को अनुदान दिया जा रहा है। मसाला फसल के तहत धनिया की खेती के लिए 119 किसान योजना का लाभ ले रहे हैं। वहीं पुष्प क्षेत्र में 2 किसान, सब्जी फसल के तहत हाइब्रिड टमाटर की खेती के लिए 18 किसान तथा फल क्षेत्र में आम, अमरूद और नींबू की खेती के लिए 47 किसान अनुदान प्राप्त कर रहे हैं।

अनुदान से कम हो रहा खेती का आर्थिक बोझ

बागवानी फसलों की खेती शुरू करने में किसानों को पौध, सिंचाई, संरचना और अन्य कृषि गतिविधियों पर खर्च करना पड़ता है। ऐसे में सरकार की योजनाओं के तहत मिलने वाला अनुदान किसानों के लिए आर्थिक मददगार साबित हो रहा है। अनुदान मिलने से किसानों पर शुरुआती निवेश का बोझ कम होता है और वे नई फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित हो रहे हैं।

बढ़ रही विविध खेती की ओर रुचि

पारंपरिक खेती के साथ फल, सब्जी, फूल और मसाला फसलों को शामिल करने से किसानों को बाजार के अनुसार अलग-अलग समय पर उपज बेचने का अवसर मिल रहा है। जिले में कई किसान इस तरह की विविध खेती को अपनाकर अपनी कृषि आय बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। कृषि और उद्यानिकी विभाग की योजनाओं के माध्यम से किसानों को नई तकनीक, फसल चयन और खेती से संबंधित जानकारी भी उपलब्ध कराई जा रही है। इससे किसानों में पारंपरिक खेती के साथ नई और लाभकारी फसलों की खेती के प्रति रुचि बढ़ रही है।

उद्यानिकी विभाग सतना के उप संचालक अनिल कुमार सिंह ने बताया कि किसान अपनी भूमि के एक हिस्से में बागवानी फसलों की खेती कर रहे हैं, जबकि शेष भूमि पर अपनी जरूरत के लिए धान, गेहूं और दलहन जैसी पारंपरिक फसलों का उत्पादन करते हैं। सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत मिलने वाले अनुदान से किसानों को आर्थिक सहायता मिल रही है, जिससे नई फसलों की खेती शुरू करने में होने वाला आर्थिक बोझ कम हो रहा है।

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