शिक्षकों की ई-अटेंडेंस अनिवार्यता मामले में फैसला सुरक्षित

जबलपुर। सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति दर्ज कराने के लिए लागू ई-अटेंडेंस व्यवस्था पर हाईकोर्ट में अब यह सवाल केंद्र में है कि सरकारी काम के लिए कर्मचारी को अपने निजी संसाधन इस्तेमाल करने के लिए बाध्य किया जा सकता है या नहीं। शिक्षकों के लिए ई-अटेंडेंस अनिवार्य किए जाने को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई पूरी कर जस्टिस विशाल धगट की एकलपीठ ने फैसला सुरक्षित कर लिया है।

उल्लेखनीय है कि अमरपाटन सतना निवासी सतेन्द्र सिंह तिवारी की ओर से दायर याचिका में बताया गया कि ई-अटेंडेंस दर्ज करने के लिए शिक्षकों को अपने निजी मोबाइल फोन और इंटरनेट कनेक्शन का उपयोग करना पड़ रहा है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अंशुमान सिंह ने तर्क दिया कि सरकारी व्यवस्था संचालित करने की जिम्मेदारी शासन की है। इसके लिए कर्मचारियों को निजी मोबाइल, इंटरनेट अथवा अन्य व्यक्तिगत संसाधन उपलब्ध कराने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। याचिका में व्यक्तिगत डिजिटल जानकारी के इस्तेमाल से जुड़ा पहलू भी उठाया गया है। ऐसे में मामला केवल उपस्थिति दर्ज कराने की तकनीकी व्यवस्था तक सीमित नहीं रह गया है। ई-अटेंडेंस से जुड़े एक अन्य मामले में हाईकोर्ट के आदेश के बाद तकनीकी कारणों से हाजिरी दर्ज नहीं हो पाने वाले शिक्षकों के वेतन भुगतान की प्रक्रिया शुरू की गई है। अब मुख्य याचिका के फैसले से ई-अटेंडेंस लागू करने की जिम्मेदारी और कर्मचारियों के निजी संसाधनों के इस्तेमाल की सीमा स्पष्ट हो सकती है।

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