सतना : विश्व आदिवासी दिवस हर वर्ष 9 अगस्त को आदिवासी समुदाय के अधिकारों, उनकी समृद्ध संस्कृति, लोक कला, भाषा, पहनावे और परंपराओं के संरक्षण तथा संवर्धन के लिए मनाया जाता है. अब तक मुख्यधारा से नही जुड़ पाने के कारण इस समुदाय को सामाजिक व आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, और यह दिन इसके प्रति जागरूकता और सम्मान प्रकट करने का प्रतीक माना जाता है. हालांकि शहर में आयोजित आदिवासी दिवस रैली के दौरान दिखा दृश्य इस दिवस के मूल उद्देश्य के विपरीत नजर आ रहा था .
रैली के दौरान न तो पारंपरिक आदिवासी वेशभूषा दिखाई दी और न ही लोक संगीत, नृत्य या सांस्कृतिक प्रतीक. इसके विपरीत पूरे आयोजन के दौरान खुलेआम डीजे की धुन पर अमर्यादित गीत बज रहे थे.इसके अलावा सबसे विचारणीय शस्त्र प्रदर्शन रहा.धारदार हथियार लेकर रैली में युवाओं की टोली शामिल थी.इसमे के लगभग 15 से 30 वर्ष की उम्र के लड़के हाथों में फरसा, कटार, तलवार, चाकू और अन्य लोहे के हथियार लहराते नजर आए
.गौरतलब है कि जिस उद्देश्य से अंतर्राष्ट्रीय आदिवासी दिवस की शुरुआत की गई थी रैली में उसकी झलक तक नहीं देखने को मिली. परंपरा और संस्कृति का संदेश तो कोसों दूर देने के सरेआम धारदार हथियारों की नुमाइश करने से सीधे-सादे कहे जाने वाले आदिवासी समुदाय की छवि प्रभावित करती स्प्ष्ट नजर आयी .प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि वीडियो फुटेज के आधार पर उपद्रवियों और हथियार लहराने वाले तत्वों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए ताकि सार्वजनिक आयोजनों में हथियारों के प्रदर्शन में लगी रोक का भविष्य में सांस्कृतिक आयोजनों की आड़ में इस तरह का प्रदर्शन कर अवेहलना न की जा सके.
प्रशासन के दावों की खुली पोल
आश्चर्यजनक रूप से सुरक्षा और कानून-व्यवस्था का दावा करने वाले स्थानीय प्रशासन और पुलिस बल की नाक के नीचे ये युवा खुलेआम नुकीले व धारदार हथियार लेकर सड़कों पर घूमते युवाओ पर किसी तरह की रोकटोक न किया जाना समझ से परे रहा . भीड़-भाड़ वाले मुख्य मार्ग जहां सार्वजनिक वाहन ऑटो-रिक्शा और आम नागरिक गुजर रहे थे वहां सरेआम हथियारों के प्रदर्शन से स्थानीय निवासियों और राहगीरों में डर और दहशत का माहौल व्याप्त हो गया
