पंचकूला, 09 अगस्त (वार्ता) रेल परियोजनाओं के क्रियान्वयन में सुधार के लिए रेल मंत्रालय ने निर्माण संगठनों में अधिकारियों के चयन, प्रशिक्षण, कार्यकाल और तबादले की व्यवस्था में बड़े बदलाव किए हैं। नई नीति के तहत निर्माण संगठन में तैनाती के इच्छुक अधिकारियों का चयन केंद्रीय चयन बोर्ड के जरिए किया जाएगा। अधिकारियों के लिए विशेष प्रशिक्षण अनिवार्य होगा और निर्माण संगठन में उनका सामान्य कार्यकाल पांच साल होगा, जिसे सात साल तक बढ़ाया जा सकेगा। इसके साथ ही अधिकारियों के कामकाज की मासिक और तिमाही स्तर पर समीक्षा की व्यवस्था भी की गई है।
रेलवे बोर्ड की ओर से जारी ‘रेलवे परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिए संगठनात्मक ढांचे में सुधार की नीति’ सभी क्षेत्रीय रेलवे और उत्पादन इकाइयों के महाप्रबंधकों तथा रेलवे निर्माण संगठनों के वरिष्ठ अधिकारियों को भेजी गई है। नीति का उद्देश्य रेल परियोजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के लिए संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करना है। इसके दायरे में निर्माण संगठनों में अधिकारियों का चयन, प्रशिक्षण, उन्हें बनाए रखने की व्यवस्था और तबादले शामिल किए गए हैं।
केंद्रीय चयन बोर्ड करेगा अधिकारियों का चयन
नई व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में केंद्रीय चयन बोर्ड (सीएसबी) का गठन शामिल है। इसमें दो एएम/पीईडी/ईडी होंगे और यह सभी विभागों से जेएस, एसएस, जेएजी, एनएफएसएजी, एसएजी और एनएफएचएजी स्तर के अधिकारियों का चयन करेगा।
विभिन्न विभागों के अधिकारियों के चयन के लिए केंद्रीय चयन बोर्ड के तहत एएम, पीईडी और ईडी स्तर की अलग-अलग समितियां होंगी।
क्षेत्रीय रेलवे के निर्माण संगठनों में काम करने के इच्छुक सभी विभागों के अधिकारियों को अब एक समर्पित पोर्टल के जरिए आवेदन करना होगा। आवेदन में उन्हें अपना बायोडाटा, किए गए व्यावसायिक पाठ्यक्रमों, अनुभव और उल्लेखनीय कार्यों का विवरण देना होगा। ग्रुप-बी अधिकारियों के आवेदन संबंधित क्षेत्रीय रेलवे तक ही सीमित रहेंगे। अधिकारियों की उपयुक्तता का आकलन केंद्रीय चयन बोर्ड के साथ संवाद के जरिए किया जाएगा।
किसी क्षेत्रीय रेलवे में जितने अधिकारियों की आवश्यकता होगी, उसके मुकाबले पांच गुना वरिष्ठतम अधिकारियों को सीएसबी संवाद के लिए बुलाएगा। इनमें पर्याप्त उपयुक्त अधिकारी नहीं मिलने पर वरिष्ठता क्रम में आगे के अधिकारियों को बुलाया जाएगा। पैनल में शामिल अधिकारियों को आवश्यकता के अनुसार निर्माण संगठन में तैनात किया जा सकेगा।
रेलवे बोर्ड ने निर्माण संगठनों में अधिकारियों के लिए पांच साल का कार्यकाल तय किया है, जिसे अधिकतम सात साल तक बढ़ाया जा सकेगा।
पहले से निर्माण संगठन में तैनात ऐसे अधिकारी जिनका कार्यकाल पांच साल से कम है, उनकी सेवा जारी रखने के लिए समीक्षा की जाएगी। उनका कार्यकाल भी सात साल तक बढ़ाया जा सकता है।
निर्माण संगठन में पांच साल से अधिक समय तक सेवा दे चुके एनएफएचएजी, एसएजी, एनएफएसएजी, जेएजी, एसएस और जेएस स्तर के अधिकारियों के लिए केंद्रीय चयन बोर्ड अलग से रिटेंशन प्रक्रिया करेगा।
इस प्रक्रिया और प्रत्येक क्षेत्रीय रेलवे की नई जरूरत के आधार पर यह तय होगा कि निर्माण संगठनों में सीएसबी के जरिए कितने अधिकारियों की तैनाती की जानी है। क्षेत्रीय रेलवे संबंधित अधिकारी के बारे में फीडबैक भी देगा, जिसे संबंधित रेलवे बोर्ड सदस्य के समक्ष रखा जाएगा।
निर्माण संगठनों में तैनात अधिकारियों के कामकाज की नियमित निगरानी के लिए भी नई व्यवस्था बनाई गई है।
अधिकारियों को अब प्रत्येक महीने अपने प्रमुख परिणाम क्षेत्र (केआरए) तैयार करने होंगे। इन पर संबंधित अधिकारी और उसके नियंत्रक अधिकारी दोनों के हस्ताक्षर होंगे।
इन केआरए के आधार पर नियंत्रक अधिकारी हर तीन महीने में मूल्यांकन रिपोर्ट तैयार कर अपने से अगले उच्च अधिकारी को सौंपेगा। इस तरह निर्माण संगठन में अधिकारियों के कामकाज के नियमित मूल्यांकन की व्यवस्था की गई है।
रेलवे निर्माण संगठन में काम करने वाले अधिकारियों के लिए विशेष प्रशिक्षण भी अनिवार्य कर दिया गया है।
निर्माण संगठन में तैनात अधिकारियों को परियोजना प्रबंधन और सूचना प्रौद्योगिकी का अनिवार्य प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके अलावा कम से कम एक तकनीकी मॉड्यूल करना होगा।
तकनीकी प्रशिक्षण में अर्थवर्क, स्ट्रक्चर, पुल, सुरंग, ओएचई/एसएंडटी/कवच, भूमि अधिग्रहण, बीआईएम/डिजिटल ट्विन्स, हाई-स्पीड ट्रैक निर्माण और कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरण जैसे विषय शामिल किए गए हैं।
नीति में जीएसवी/सीटीआई द्वारा दो से तीन सप्ताह का प्रशिक्षण अनिवार्य किया गया है। रेलवे बोर्ड ने साफ किया है कि निर्माण संगठन में काम करने के लिए इस पाठ्यक्रम को उत्तीर्ण करना आवश्यक होगा।
इससे परियोजना प्रबंधन के साथ आधुनिक तकनीक और रेलवे निर्माण से जुड़े विशेष क्षेत्रों का प्रशिक्षण भी अधिकारियों की तैनाती व्यवस्था का हिस्सा बन गया है।
नीति में निर्माण विंग में दोबारा तैनाती से पहले दो साल की कूलिंग ऑफ अवधि भी निर्धारित की गई है। इससे किसी भी तरह की छूट के लिए संबंधित रेलवे बोर्ड सदस्य की मंजूरी आवश्यक होगी।
इस प्रावधान के साथ पांच से सात साल के कार्यकाल की व्यवस्था निर्माण संगठनों में अधिकारियों की तैनाती और निरंतरता के लिए एक निर्धारित ढांचा तैयार करती है।
रेलवे बोर्ड ने तबादलों के लिए सक्षम अधिकारियों का स्तर भी निर्धारित कर दिया है। सीएओ/सी, एनएफएचएजी और एसएजी स्तर के अधिकारियों के तबादलों को रेलवे बोर्ड के चेयरमैन एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीआरबी) की मंजूरी की जरूरत होगी।
वहीं, जेएजी और उससे नीचे के अधिकारियों के तबादलों को संबंधित रेलवे बोर्ड सदस्य मंजूरी देगा।
नई नीति में जहां तक संभव हो, अधिकारियों को उसी स्थान पर पदोन्नति देने के प्रयास का भी प्रावधान किया गया है। हालांकि डीआरएम, पीएचओडी, जीएम या एएम पद पर पदोन्नति होने पर स्वाभाविक तबादला होगा।
रेलवे बोर्ड के मुताबिक, निर्माण संगठनों के ढांचे की व्यापक समीक्षा और शीर्ष स्तर पर विचार-विमर्श के बाद ये सुधार किए गए हैं। इसका मकसद अधिकारियों के चयन, प्रशिक्षण, कार्य निष्पादन की निगरानी, कार्यकाल और तबादले के लिए व्यवस्थित ढांचा तैयार कर रेल परियोजनाओं के क्रियान्वयन को बेहतर बनाना है।
