अमेरिकी नाकेबंदी को मात देने के लिए ईरान का नया दांव, इराक के ‘उम्म कसर’ बंदरगाह का कर रहा इस्तेमाल

तेहरान, 05 जून (वार्ता) ईरान के दक्षिणी बंदरगाहों की अमेरिकी नाकेबंदी को 50 से अधिक दिन बीत चुके हैं। इस बीच ओमान के खसाब बंदरगाह के जरिये ईरान का पहला बड़ा वैकल्पिक रास्ता अब धीमा, व्यस्त और महंगा हो गया है।

इस बीच इराक का उम्म कसर बंदरगाह ईरान जाने वाले सभी कार्गो के लिए एक और मजबूत विकल्प के रूप में उभर रहा है।

‘ईरान इंटरनेशनल’ को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बंदरगाहों से गैर-ईरानी झंडे वाले जहाजों पर शिपमेंट स्थानांतरित होने के बाद अब कारों सहित तेहरान जाने वाले सभी माल को लाने-ले जाने के लिए इस इराकी बंदरगाह का इस्तेमाल किया जा रहा है।

माल ढुलाई के इस नये मार्ग से ईरान की उन कोशिशों को एक नया सहारा मिला है। इसके जरिये वह अमेरिकी नाकेबंदी को मात देने में जुटा है। यह नाकेबंदी 13 अप्रैल को शुरू हुई थी। इस कारण रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य कॉरिडोर के मुख्य रास्ते इस इस्लामिक गणराज्य से जुड़े सभी जहाजों के लिए पूरी तरह बंद हो गये थे।

शुरुआत में होर्मुज जलडमरूमध्य के मुहाने के पास मुसेंदम प्रायद्वीप पर स्थित ओमान का खसाब बंदरगाह ईरान में सामान भेजने के मुख्य विकल्पों में से एक बन गया था। जो माल पहले सामान्य यूएई-ईरान रूट से जाता था, उसे अमीरात के बंदरगाहों से खसाब स्थानांतरित किया गया और फिर वहां से ईरान के दक्षिणी तट पर जाने वाले ईरानी जहाजों पर लाद दिया गया।

सूत्रों के अनुसार पिछले कुछ हफ्तों में मांग बढ़ने के कारण हालांकि यह मार्ग लगातार धीमा होता चला गया है। इसके साथ ही खसाब में जमा होने वाले जहाजों की संख्या भी बढ़ गयी है। बंदरगाह की सीमित क्षमता के कारण माल की लोडिंग और ट्रांसफर में अब संघर्ष विराम के शुरुआती दिनों की तुलना में कहीं अधिक समय और पैसा लग रहा है।

ओमान ने पहले कुछ सामान पर सीमित प्रतिबंध या शुल्क लगाया था, उसने भी हाल के हफ्तों में कुछ खास सामान पर नये शुल्क लागू कर दिये हैं। एक व्यापारिक स्रोत का संकेत है कि कारों सहित कुछ शिपमेंटों पर अब सामान के मूल्य के आधार पर शुल्क वसूला जा रहा है। यही वजह है कि इराक का उम्म कसर बंदरगाह एक और व्यावहारिक र्ग्ग के रूप में सामने आया है, जहां से कारों को बड़े पैमाने पर ईरान भेजे जाने की खबरें हैं।

अभी हालांकि इस बात की कोई पुष्टि नहीं हुई है कि अन्य श्रेणियों का सामान भी इसी मार्ग से स्थानांतरित किया जा रहा है या नहीं।

इस तरीके के तहत, कारों या ईरान जाने वाले अन्य सामान को पहले दुबई सहित यूएई के शिपयार्ड से गैर-ईरानी झंडों वाले जहाजों के जरिये उम्म कसर भेजा जाता है, जिसके बाद उस माल को जमीन या पानी के रास्ते ईरान पहुंचा दिया जाता है। जमीनी रास्ते की बात करें तो शिपमेंट उम्म कसर से बसरा जाती है, फिर वहां से ईरान की शलमचेह सीमा चौकी पहुंचती है और इसके बाद इस माल को बंदरगाह शहर खुर्रमशहर सहित ईरान के अन्य ठिकानों तक पहुंचाया जाता है। वहीं समुद्री रास्ते से खुर्रमशहर की ओर जाने वाले जहाजों को शत्त अल-अरब में प्रवेश करना होता है, जिसे ईरान में अरवंद नदी कहा जाता है। इसके बाद ये जहाज इस इस्लामिक गणराज्य के अन्य तटों की ओर बढ़ते हैं।

कुछ माल उम्म कसर से खोर अब्दुल्ला जलमार्ग के रास्ते बंदर लंगेह सहित दक्षिणी ईरानी बंदरगाहों की ओर भी भेजा जा सकता है। भारी ट्रैफिक और बढ़ती लागत के बावजूद खसाब अब भी कई व्यापारियों के लिए पसंदीदा विकल्प बना हुआ है, क्योंकि यहां माल जमीन और समुद्र दोनों रास्तों से ओमान पहुंच सकता है। कुछ खेपों को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से सड़क मार्ग के जरिये ओमान ले जाया जा सकता है। व्यापारिक सूत्रों का कहना है कि पूरी तरह से समुद्री मार्गों की तुलना में ओमान जाने वाले कुछ जमीनी सामानों की निगरानी कम सख्त होती है।

उम्म कसर का रूट हालांकि इससे अलग है। अमीरात से इस इराकी बंदरगाह पर जाने वाले माल को आमतौर पर दुबई या यूएई के अन्य आधिकारिक शिपयार्डों पर ही लादना पड़ता है, जहां ट्रेलरों और कंटेनरों को स्कैनिंग सिस्टम से गुजरना पड़ता है और वे अधिक सख्त नियंत्रण का सामना करते हैं। इसके अलावा उम्म कसर की भौगोलिक स्थिति भी इसे ईरान के व्यापारिक नेटवर्क के लिए उपयोगी बनाती है, क्योंकि यह बसरा से महज 60 किलोमीटर दक्षिण में स्थित है और खाड़ी क्षेत्र में इराक के सबसे महत्वपूर्ण टर्मिनलों में से एक है। अनाज और चीनी सहित बुनियादी वस्तुओं के इराक के आयात का एक बड़ा हिस्सा इसी बंदरगाह से होकर गुजरता है, जो इराक को खाड़ी के व्यापारिक मार्गों से जोड़ता है।

बसरा, शलमचेह बॉर्डर और ईरान के खुजेस्तान प्रांत से इसकी निकटता के कारण यह दक्षिण-पश्चिमी ईरान की ओर जाने वाले माल के लिए एक व्यावहारिक विकल्प बन गया है। ईरानी स्थानीय अधिकारियों ने पहले भी इस रूट के इस्तेमाल का जिक्र किया था।

खुजेस्तान के आर्थिक मामलों के उपराज्यपाल जवाद काजेम-नसब अल-बाजी ने मई में ईरान के सीमा शुल्क प्रशासन के प्रमुख के साथ एक बैठक में कहा था कि इराक के उम्म कसर बंदरगाह के जरिये बुनियादी वस्तुओं और राहत सामग्री के प्रवेश के लिए समझौते हो चुके हैं।

तमाम सहूलियतों के बावजूद इस वैकल्पिक मार्ग के अपने जोखिम भी हैं। इसे हाल ही में उम्म कसर में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) की नौसेना के एक वाणिज्यिक जहाज को निशाना बनाये जाने से समझा जा सकता है, जिसे उसने ‘अमेरिकी-इजरायली’ करार दिया था। आईआरजीसी का कहना था कि यह हमला ईरानी जहाज ‘लियान स्टार’ पर अमेरिकी हमले के जवाब में किया गया था।

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