जबलपुर: थाना गोरखपुर स्थित श्री दुर्गा मंदिर परिसर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में कथा व्यास पं. सतीश कृष्ण चंद्र शास्त्री ने भगवान के विभिन्न अवतारों और उनकी लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा के दौरान अजामिल उपाख्यान, प्रह्लाद भक्त चरित्र, वामन भगवान एवं श्रीराम कथा का विस्तार से वर्णन किया गया। कथा व्यास ने कहा कि जब-जब धरती पर पाप, अत्याचार और अधर्म बढ़ता है, तब-तब भगवान नारायण जीवों के कल्याण और धर्म की स्थापना के लिए विभिन्न रूपों में अवतार धारण करते हैं। श्रीकृष्ण जन्म प्रसंग के वर्णन के दौरान पूरा कथा पंडाल ‘नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ के जयघोष से गूंज उठा और श्रद्धालु भक्ति में भावविभोर नजर आए।
पंचम दिवस की कथा में भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का मनोहारी वर्णन किया गया। कथा व्यास ने श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं के साथ गोवर्धन लीला का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी बाल अवस्था में ही इंद्र के अहंकार का मर्दन कर ब्रजवासियों को प्रकृति और गोवर्धन पर्वत की महत्ता का संदेश दिया। उन्होंने बताया कि सात वर्ष की आयु में कन्हैया ने अपनी सबसे छोटी उंगली पर विशाल गोवर्धन पर्वत को धारण कर ब्रजवासियों की रक्षा की। कथा के दौरान भगवान की बाल लीलाओं का वर्णन सुनकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह दिखाई दिया। भजन और धार्मिक जयघोषों के बीच श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में लीन रहे।
इनकी रही उपस्थिति
छठे दिवस श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह प्रसंग ने बांधा समां। कथा के छठे दिन व्यास पीठ पर विराजमान पं. सतीश कृष्ण चंद्र शास्त्री ने रास के पांच अध्यायों का वर्णन करते हुए श्रीकृष्ण की भक्ति, प्रेम और आध्यात्मिक स्वरूप को समझाया। इसके बाद श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह का प्रसंग सुनाया गया। कथा व्यास ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी का विवाह प्रेम, समर्पण और भक्ति का प्रतीक है। विवाह प्रसंग के दौरान श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से जयकारे लगाए। आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की सहभागिता रही। व्यास पीठ का पूजन हेमंत सोनी, वंशी ठाकुर, अनिल चौरसिया, किरण साउंड सर्विस, महावर दादा, कविता शुक्ला, कल्याणी मिश्रा, किरण दुबे, ममता श्रीवास्तव सहित दुर्गा मंदिर गोरखपुर की महिला मंडली द्वारा किया गया। कथा के दौरान मंदिर परिसर का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहा।
