इंदौर: ऑनलाइन ठगी के शिकार लोगों के लिए क्राइम ब्रांच इंदौर ने इस साल बड़ी राहत दी है. जनवरी से जुलाई 2026 तक साइबर फ्रॉड की शिकायतों पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने 4 करोड़ 75 लाख 17 हजार 352 रुपए की राशि पीड़ितों को वापस कराई है. इस दौरान पुलिस ने ठगी में इस्तेमाल किए जा रहे हजारों फर्जी बैंक खातों को फ्रिज कराया, जबकि हैक किए गए 200 से अधिक सोशल मीडिया अकाउंट रिकवर कराए हैं.
इस साल जुलाई तक मिली साइबर ठगी की हजारों शिकायतों में फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन टीमों ने तत्काल कार्रवाई करते हुए राशि होल्ड कराने और वापस कराने के प्रयास किए. जनवरी में 36 लाख 46 हजार 49 रुपए, फरवरी में 91 लाख 95 हजार 726 रुपए, मार्च में 59 लाख 5 हजार 830 रुपए, अप्रैल में 49 लाख 29 हजार 971 रुपए, मई में 47 लाख 31 हजार 255 रुपए, जून में 40 लाख 88 हजार 96 रुपए और जुलाई में सबसे अधिक 1 करोड़ 50 लाख 20 हजार 425 रुपए पीड़ितों को वापस कराए. पुलिस जांच में सामने आया है कि साइबर ठग अब नए नए तरीकों से लोगों को निशाना बना रहे हैं. ऑनलाइन ट्रेडिंग, गेमिंग, वर्क फ्रॉम होम और टास्क पूरा करने के नाम पर ठगी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं. वहीं डिजिटल अरेस्ट के नाम पर फर्जी पुलिस, कस्टम और सीबीआई अधिकारी बनकर वीडियो कॉल के जरिए डराने के मामले भी बढ़े हैं.
इसके अलावा एआई तकनीक का इस्तेमाल कर आवाज और चेहरे की नकल कर परिचित या रिश्तेदार बनकर पैसे मांगने की शिकायतें भी मिली हैं. फर्जी लोन ऐप, बैंक अधिकारी बनकर केवाईसी अपडेट कराने, बिजली बिल कटने का डर दिखाने और सोशल मीडिया पहचान चुराकर ठगी करने के मामलों में भी पुलिस ने कार्रवाई की है. क्राइम ब्रांच ने लोगों से अपील की है कि अनजान कॉल, लिंक और ऐप के माध्यम से अपनी बैंकिंग जानकारी साझा नहीं करें तथा साइबर ठगी होने पर तत्काल शिकायत दर्ज कराएं.
बैंक संबंधी जानकारी किसी को न देवें…
साइबर ठगी के मामलों में तत्काल शिकायत मिलने पर पुलिस राशि होल्ड कराने और पीड़ितों को वापस दिलाने के लिए लगातार कार्रवाई कर रही है. लोगों को साइबर अपराधों से बचाव के लिए जागरूक भी किया जा रहा है. किसी भी अनजान कॉल, लिंक या ऐप पर बैंक संबंधी जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए.
एडिशनल डीसीपी क्राईम, राजेश दंडोतिया
