मुंबई, 06 अगस्त (वार्ता) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बैंकों, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों और ऋण देने वाली अन्य विनियमित इकाइयों के लिए ऋण वसूली के संशोधित नियम गुरुवार को जारी कर दिये।
इसमें कहा गया है कि रिकवरी के लिए बैंक द्वारा नियुक्त किसी भी एजेंसी या एजेंट के काम और व्यवहार की पूरी जिम्मेदारी बैंक को लेनी होगी। बैंक अपनी वेबसाइट पर उसके द्वारा नियुक्त सभी रिकवरी एजेंसियों (कंपनी के रूप में या व्यक्तिगत) की जानकारी देनी होगी। साथ ही रिकवरी एजेंट के पहले बार उधारकर्ता के घर पर जाने से एक दिन पहले बैंक एजेंसी का नाम और संपर्क के लिए नंबर उधारकर्ता को भेजेगा।
नये नियमों के अनुसार यदि रिकवरी एजेंट उधारकर्ता से या उधारकर्ता उस एजेंट से फोन पर बात करता है तो उसकी रिकॉर्डिंग छह महीने तक सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी ऋणदाता की होगी। यदि मामला अदालत में जाता है तो अदालती प्रक्रिया पूरी होनी तक कॉल की रिकॉर्डिंग रखनी होगी।
सभी बैंकों तथा अन्य विनियमित इकाइयों से कहा गया है कि वे आंतरिक तौर पर ऋण वसूली के नियम बनायें। इसमें यह भी उल्लेख करना जरूरी है कि किस बिंदू पर वसूली प्रक्रिया शुरू की जायेगी। रिकवरी प्रक्रिया के दौरान यदि उधारकर्ता को कोई नुकसान होता है तो उसकी क्षतिपूर्ति की जिम्मेदारी भी बैंक की होगी।
रिकवरी के दौरान सिक्योरिटी के तौर पर रखी गयी संपत्ति जब्त करने के लिए गये बैंक के कर्मचारी और रिकवरी एजेंट को अपना पहचान पत्र दिखाना होगा। रिकवरी एजेंट के पास बैंक या रिकवरी एजेंसी द्वारा जारी प्राधिकार पत्र होना अनिवार्य होगा जिसमें अन्य विवरण के साथ रिकवरी एजेंसी और शिकायत समाधान अधिकारी के फोन नंबर भी होंगे।
बैंक के कर्मचारी या रिकवरी एजेंट उधारकर्ता या गारंटर से उनकी पसंद के स्थान पर ही मुलाकात करेंगे। यदि उधारकर्ता या गारंटर लगातार दो बार खुद की बताई जगह पर नहीं आते हैं तभी रिकवरी एजेंट उनके घर या कार्यस्थल पर जा सकते हैं।
आरबीआई ने साफ शब्दों में कहा है कि रिकवरी एजेंट या बैंक के कर्मचारी वसूली प्रक्रिया के दौरान कोई कठोर तरीका नहीं अपनायेंगे। इन कठोर तरीकों में गाली देना, सोशल मीडिया पर उधारकर्ता के वीडियो या ऑडियो रिकॉर्डिंग या व्यक्तिगत विवरण डालना, मोबाइल या सोशल मीडिया पर अभद्र संदेश भेजना, बार-बार और तय समय के बाद या पहले फोन तथा मैसेज भेजना और धमकी देना या ब्लैंक कॉल करना शामिल है।
उधारकर्ता या गारंटर के परिजनों, दोस्तों या सहकर्मियों को धमकी देना या परेशान करना, उन्हें सार्वजनिक रूप से बेइज्जत करना या उनकी निजता में दखल देना भी इसी श्रेणी में शामिल होगा। ऋण न चुकाने के परिणामों के बारे में बढ़-चढ़ाकर बताना भी कठोर तरीकों में शामिल है।
