
जबलपुर। कुछ वर्ष पूर्व में जब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी का विभाजन किया गया तब जबलपुर और ग्वालियर को बराबर के हिस्से दिये गये, लेकिन अब मप्र मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी के विभाजन में बराबर के दो हिस्से नहीं कर बड़ा हिस्सा उज्जैन को और छोटा हिस्सा जबलपुर को दिया गया। यह जबलपुर मेडिकल यूनिवर्सिटी के साथ सोची समझी साजिश इसलिए रची गयी, जिससे आगामी वर्षों में जबलपुर एम यू का आर्थिक कंगाली से अस्तित्व ही समाप्त हो जाये और उसके बाद प्रदेश में मात्र एक ही मेडिकल यूनिवर्सिटी उज्जैन की ही बनी रह सके।
यह आपत्ति गुरूवार को नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने मेडिकल यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार डॉ. पुष्पराज सिंग के माध्यम से डायरेक्टर मेडिकल एज्यूकेशन व प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा विभाग भोपाल को भेजी।
250 करोड़ का बंटवारा गैर कानूनी
आपत्ति में बताया गया है कि 20 जुलाई को क्रमांक-207 तथा 210 पर म.प्र. राजपत्र में प्रकाशित सूचना के अनुसार जबलपुर और उज्जैन में दो अलग-अलग मेडिकल यूनिवर्सिटी होगी। एम यू के एक्ट में कहीं भी संशोधन नहीं किया गया है कि मूलधन का बंटवारा हो। ऐसे में वर्तमान जबलपुर एम यू के पास के 250 करोड़ रिजर्व फण्ड का बंटवारा गैर कानूनी है।
