
परसवाड़ा, असम स्थित सीआरपीएफ कैंप में हुई घटना में शहीद हुए परसवाड़ा क्षेत्र के वीर जवान विष्णु बघेल का पार्थिव शरीर गुरुवार दोपहर लगभग 12 बजे उनके गृह क्षेत्र पहुंचा। तिरंगे में लिपटे पार्थिव शरीर के परसवाड़ा पहुंचते ही पूरा क्षेत्र शोक में डूब गया। हजारों की संख्या में ग्रामीण, महिलाएं, बच्चे, युवा एवं जनप्रतिनिधि अपने वीर सपूत को अंतिम विदाई देने उमड़ पड़े। हर किसी की आंखें नम थीं और वातावरण “भारत माता की जय” तथा “शहीद विष्णु बघेल अमर रहें” के नारों से गूंज उठा।
बीजाटोला से शुरू हुई अंतिम यात्रा तहसील कार्यालय, पुलिस थाना, बस स्टैंड होते हुए शेरपार रोड स्थित उनके निज निवास पहुंची। पूरे मार्ग में नागरिकों ने जगह-जगह पुष्पवर्षा कर श्रद्धासुमन अर्पित किए। कई स्थानों पर लोगों ने हाथ जोड़कर तिरंगे में लिपटे पार्थिव शरीर को अंतिम प्रणाम किया। बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे भी अंतिम यात्रा में शामिल हुए।
घर पहुंचते ही मचा मातम
जैसे ही पार्थिव शरीर उनके निवास पहुंचा, पत्नी सावित्री बघेल, पुत्री माही बघेल, 15 वर्षीय पुत्र काव्य बघेल तथा वृद्ध माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। परिवार के करुण क्रंदन से वहां मौजूद लोग भी भावुक हो उठे। रिश्तेदारों, ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने परिजनों को ढांढस बंधाने का प्रयास किया, लेकिन हर आंख नम दिखाई दी।
दो घंटे तक चली चर्चा, परिवार ने रखीं चार प्रमुख मांगें
पार्थिव शरीर घर पहुंचने के बाद अंतिम संस्कार की प्रक्रिया करीब दो घंटे तक रुकी रही। इस दौरान सीआरपीएफ अधिकारियों और परिजनों के बीच लंबी चर्चा चली। पत्नी सावित्री बघेल ने कहा कि उनके पति ने देश की सेवा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया है, इसलिए सरकार उनके परिवार की जिम्मेदारी भी उठाए।
उन्होंने अधिकारियों के समक्ष चार प्रमुख मांगें रखीं। पहली, विष्णु बघेल को आधिकारिक रूप से शहीद का दर्जा दिया जाए। दूसरी, पुत्र काव्य बघेल एवं पुत्री माही बघेल की संपूर्ण शिक्षा का खर्च केंद्र सरकार वहन करे तथा शिक्षा पूरी होने के बाद दोनों को केंद्र अथवा राज्य सरकार में शासकीय सेवा दी जाए। तीसरी, वृद्ध माता-पिता के इलाज एवं चिकित्सा की संपूर्ण जिम्मेदारी सरकार उठाए। चौथी, उन्हें अनुकंपा नियुक्ति प्रदान की जाए ताकि परिवार का भरण-पोषण और बच्चों का भविष्य सुरक्षित रह सके।
ग्रामीणों और रिश्तेदारों ने भी इन मांगों का समर्थन करते हुए शहीद को पूर्ण सम्मान दिए जाने की मांग उठाई।
जनप्रतिनिधियों ने अधिकारियों से की चर्चा
परिजनों की मांगों को लेकर विधायक मधु भगत ने असम स्थित सीआरपीएफ के वरिष्ठ अधिकारियों से दूरभाष पर चर्चा की। समाजसेवी रामेश्वर कटरे ने भी दोनों पक्षों के बीच समन्वय स्थापित करने का प्रयास किया। वहीं एसडीएम श्रीश प्याशी ने परिजनों को शासन स्तर पर आवश्यक पत्राचार एवं हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया। करीब दो घंटे तक चली चर्चा के बाद सीआरपीएफ के वरिष्ठ अधिकारियों ने दूरभाष पर शहीद सम्मान संबंधी प्रक्रिया आगे बढ़ाने का आश्वासन दिया, जिसके बाद परिजनों ने अंतिम संस्कार की सहमति दी।
गार्ड ऑफ ऑनर के साथ दी अंतिम विदाई
दोपहर को पार्थिव शरीर को मोक्षधाम शक्ति घाट ले जाया गया, जहां सीआरपीएफ के जवानों ने पूरे सैन्य सम्मान के साथ गार्ड ऑफ ऑनर देकर अपने साथी को अंतिम सलामी दी। इसके बाद 15 वर्षीय पुत्र काव्य बघेल ने नम आंखों से अपने पिता को मुखाग्नि दी। अंतिम संस्कार से पूर्व दो मिनट का मौन रखकर शहीद की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई।
परिजनों ने लगाया सूचना नहीं मिलने का आरोप
मीडिया से चर्चा में परिजन शिखर बघेल ने आरोप लगाया कि घटना के बाद उन्हें सीआरपीएफ की ओर से आधिकारिक रूप से कोई सूचना नहीं दी गई। उन्हें जवान के शहीद होने की जानकारी सोशल मीडिया के माध्यम से मिली। वहीं पत्नी सावित्री बघेल ने कहा कि सीआरपीएफ अधिकारियों ने उनकी मांगों को सुना है और वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है।
कलेक्टर और एसपी की अनुपस्थिति पर उठे सवाल
इस दौरान विधायक मधु भगत ने शहीद जवान के निवास पर जिले के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों, विशेष रूप से कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक की अनुपस्थिति पर नाराजगी व्यक्त की।
बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि एवं नागरिक रहे मौजूद
अंतिम यात्रा एवं अंतिम संस्कार में विधायक मधु भगत, समाजसेवी रामेश्वर कटरे, लघु वनोपज जिलाध्यक्ष अशोक मंडलेकर, जिला पंचायत उपाध्यक्ष राजा लिल्हारे, जिला पंचायत सदस्य दलसिंह पन्द्रे एवं तामेश्वर पटेल, जनपद अध्यक्ष समलसिंह धुर्वे, जनपद उपाध्यक्ष कांति राहंगडाले, एसडीएम श्रीश प्याशी, तहसीलदार श्री तेकाम, थाना प्रभारी अनुप नामदेव, पुलिस बल, सीआरपीएफ के अधिकारी एवं जवान सहित हजारों की संख्या में क्षेत्रीय नागरिक, महिलाएं, युवा और बच्चे उपस्थित रहे। पूरे क्षेत्र ने अपने वीर सपूत को नम आंखों से अंतिम विदाई दी।
