इंदौर:21 वीं सानंद नाट्य स्पर्धा के तीसरे दिन बुधवार को इंदौर की सबसे पुरानी संस्था श्री अहिल्या नाट्य मंडल ने सामाजिक संदेश के साथ राजनीतिक विमर्श खड़ा करता नाटक मैडम का मंचन किया. नाटक की लेखिका सारिका ढेरंगे हैं. जबकि दिग्दर्शक का दायित्व संभाला है महान रंगकर्मी इतिहासकार स्वर्गीय गणेश मतकर के पोते चिन्मय सुनील मतकर ने.
राजनीति जब सिद्धांतों से अधिक सत्ता का खेल बन जाती है, तब सबसे पहले आहत होता है आम नागरिक का विश्वास. मैडम दरअसल, इसी टूटते विश्वास, सामाजिक विघटन और मानवीय संवेदनाओं के क्षरण को केंद्र में रखकर रचा गया एक प्रभावशाली नाटक है.
यह किसी व्यक्ति विशेष की कहानी नहीं, बल्कि उस दौर का रंग-दस्तावेज है, जिसमें विचारधाराएं बदलना आसान हो गया है, किंतु विश्वास का पुनर्निर्माण सबसे कठिन कार्य बन चुका है. मैडम अंततः यह प्रश्न दर्शकों के सामने छोड़ जाती है कि लोकतंत्र केवल चुनावों से जीवित रहता है या फिर जनता के विश्वास, नैतिकता और सत्य के प्रति प्रतिबद्धता से. यही प्रश्न इस नाटक को समकालीन रंगमंच की एक सार्थक, प्रासंगिक और लंबे समय तक स्मृति में बनी रहने वाली प्रस्तुति बना देता है. निर्देशक चिन्मय सुनील मतकर ने नाटक की वैचारिक गंभीरता को मंच पर पूरी संवेदनशीलता के साथ रूपांतरित किया है. कहीं भी अनावश्यक नाटकीयता का सहारा नहीं लिया गया, जिससे प्रस्तुति का प्रभाव और अधिक विश्वसनीय बनकर उभरता है.
कथासार…
नाटक का केंद्रीय पात्र राम शितोले केवल एक किसान पुत्र या सामाजिक कार्यकर्ता नहीं, बल्कि उस युवा पीढ़ी का प्रतिनिधि है जो व्यवस्था से प्रश्न पूछने का साहस रखती है. उसके भीतर पिता की आत्महत्या का दर्द है, किसानों की व्यथा है और राजनीति से परिवर्तन की अपेक्षा भी. जब उसका आदर्श नेता अवसरवाद का रास्ता चुनता है, तब उसका आक्रोश केवल एक व्यक्ति के विरुद्ध नहीं, बल्कि उस राजनीतिक संस्कृति के विरुद्ध खड़ा होता है, जिसने जनविश्वास को सबसे सस्ता संसाधन बना दिया है. नाटक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह आरोप-प्रत्यारोप के स्तर पर नहीं ठहरता. राम और मीनाक्षी के बीच होने वाले संवाद धीरे-धीरे सत्ता और समाज के बीच छिपे अनेक सच उद्घाटित करते हैं. एक ओर व्यवस्था से मोहभंग का दर्द है, तो दूसरी ओर सत्ता के भीतर पलते नैतिक द्वंद्व.. समकालीन राजनीति की विसंगतियों पर तीखे प्रश्न उठाने के बावजूद नाटक कहीं भी उपदेशात्मक नहीं बनता.
कलाकार
भूषण दीक्षित, तुषार धर्माधिकारी, आनंद कामले, रूही गंधे-नाईक, देवेन्द्र खैरीकर, यश पारखी, पंकज कुलकर्णी, विपीन मतकर, दुर्वाकुर द्रविड, रूपाली रूद्र-दुबे, यतीश मतकर, गजानन खोंडे, गौतम बुळे, डॉ. पंकज उपाध्याय, सुजीत कुळकर्णी, संजय कुळकर्णी, सुंदर राजन द्रविड.
