भारत-उज्बेकिस्तान के ऐतिहासिक रिश्ते और मजबूत होंगे: बिरला

नयी दिल्ली, 04 अगस्त (वार्ता) लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मंगलवार को कहा कि भारत और उज्बेकिस्तान सदियों पुराने ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों से जुड़े हुए हैं और जो दोनों देशों की स्थायी मित्रता की मजबूत नींव हैं। श्री बिरला ने आज संसद भवन में उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री बख्तियोर सईदोव से मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने संसदीय सहयोग, व्यापार, निवेश, शिक्षा, संस्कृति तथा क्षेत्रीय और वैश्विक महत्व के मुद्दों पर व्यापक चर्चा की।उन्होंने विश्वास जताया कि बढ़ता राजनीतिक विश्वास, व्यापार एवं निवेश में विस्तार और लोगों के बीच बढ़ते संपर्क आने वाले वर्षों में द्विपक्षीय साझेदारी को नयी ऊंचाइयों तक ले जायेंगे। अध्यक्ष ने भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र होने के नाते भारत की संसदीय व्यवस्था देश की विविधता और जनता की आकांक्षाओं का प्रभावी प्रतिनिधित्व करती है।

उन्होंने बताया कि 543 सदस्यीय लोकसभा करोड़ों नागरिकों की आवाज़ है और बहुदलीय व्यवस्था सभी विचारों को समान अवसर प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि संसद वर्ष में तीन सत्रों में कार्य करती है और वर्तमान मानसून सत्र में कई महत्वपूर्ण राष्ट्रीय विषयों पर चर्चा हो रही है। लोकसभा अध्यक्ष ने भारत की बुनियादी ढांचे, डिजिटल नवाचार, प्रौद्योगिकी, कनेक्टिविटी, निवेश और व्यापार के क्षेत्र में उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय युवा वैश्विक स्तर पर नेतृत्व की भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने मार्च 2026 में गठित भारत-उज्बेकिस्तान संसदीय मैत्री समूह का जिक्र करते हुए कहा कि यह पहल दोनों देशों के बीच संसदीय संवाद को नयी गति देगी तथा आर्थिक, शैक्षिक, सांस्कृतिक और जन-से-जन संबंधों को और मजबूत करेगी।

उन्होंने अप्रैल 2025 में ताशकंद में आयोजित इंटर-पार्लियामेंटरी यूनियन (पीयू) की 150वीं महासभा में अपनी भागीदारी और उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव सहित शीर्ष नेताओं से हुई मुलाकातों को भी द्विपक्षीय सहयोग के लिए महत्वपूर्ण बताया। उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री बख्तियोर सईदोव ने भारत के साथ बहुआयामी साझेदारी को और गहरा करने की अपने देश की प्रतिबद्धता दोहरायी। उन्होंने कहा कि ताशकंद भारत के साथ राजनीतिक, आर्थिक और संसदीय सहयोग के विस्तार को अत्यधिक महत्व देता है। भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के संसदीय अनुभव से उज्बेकिस्तान को काफी सीख मिलेगी। उन्होंने व्यापार, निवेश, संयुक्त परियोजनाओं और उभरते क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर बल दिया।

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