भोपाल। मेट्रो का सपना अब कई परिवारों के लिए दर्द की कहानी बनता जा रहा है। पुराने शहर के काजी कैंप में मेट्रो स्टेशन के निर्माण के लिए दशकों पुरानी दुकानें और मकान टूटने लगे हैं। कोई अपनी रोजी-रोटी खो रहा है, तो कोई अपना आशियाना। लोगों का कहना है कि विकास चाहिए… लेकिन बेघर होकर नहीं।
काजी कैंप में सोमवार से अतिक्रमण हटाने और भवन तोड़ने की कार्रवाई शुरू हो गई। पूरे इलाके में कई दुकानों और मकानों के बाहर विरोध के पोस्टर और बैनर लगे हैं। वर्षों से कारोबार कर रहे व्यापारी अब अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। उनका कहना है कि वे मेट्रो परियोजना के विरोधी नहीं हैं, लेकिन जिस मुआवजे की पेशकश की गई है, उससे नई दुकान या कारोबार शुरू करना संभव नहीं है।
स्थानीय व्यापारियों का दावा है कि कई परिवार तीन-तीन पीढ़ियों से इसी इलाके में रह रहे हैं। एक से डेढ़ लाख रुपये के मुआवजे में न घर बन सकता है और न ही कारोबार दोबारा खड़ा किया जा सकता है। लोगों का कहना है कि उनके लिए यह सिर्फ संपत्ति नहीं, बल्कि पूरी जिंदगी की कमाई और यादें हैं।
मेट्रो परियोजना से जुड़े अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी। उधर लोगों की चिंता अब और बढ़ गई है, क्योंकि अंडरग्राउंड मेट्रो और ब्लू लाइन कॉरिडोर के दायरे में आने वाली कई और इमारतों पर भी कार्रवाई की आशंका जताई जा रही है।
काजी कैंप के लोग विकास का विरोध नहीं कर रहे… लेकिन उनका सवाल है कि अगर विकास की कीमत उनका घर और रोजगार है, तो आखिर उनके भविष्य की जिम्मेदारी कौन लेगा?
दीपक तिवारी की रिपोर्ट।
